हार्ट मरीजों के लिए वरदान बना आयुर्वेद! डॉ. रोहित साने का यह खास विजन कैसे बचा रहा है लोगों की जान?
Cardiac Care in Ayurveda: आयुर्वेद का मूल सिद्धांत केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्” यानी स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है।
- Written By: नवभारत डेस्क
डॉ. रोहित साने, (फाइल फोटो)
Cardiac Care in Ayurveda: भारत में आयुर्वेद केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी जीवनशैली और स्वास्थ्य विज्ञान की परंपरा मानी जाती है। वर्तमान समय में जब दुनिया भर में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, समग्र स्वास्थ्य और नेचुरल वेलनेस को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, तब भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है। केंद्र सरकार द्वारा आयुष मंत्रालय के माध्यम से आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कई पहल की जा रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के सहयोग से गुजरात के जामनगर में स्थापित Global Centre for Traditional Medicine भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस केंद्र का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को रिसर्च, वैज्ञानिक अध्ययन और वैश्विक हेल्थ फ्रेमवर्क से जोड़ना है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में evidence-based traditional medicine वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
क्या है आयुर्वेद का मूल सिद्धांत?
आयुर्वेद का मूल सिद्धांत केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्” यानी स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना भी है। आयुर्वेद में दिनचर्या, संतुलित आहार, मानसिक स्वास्थ्य, नींद, योग और प्राकृतिक जीवनशैली को स्वास्थ्य प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। आधुनिक समय में बढ़ती हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे जैसी समस्याओं के बीच आयुर्वेद के इन्हीं प्रिवेंटिव सिद्धांतों पर फिर से ध्यान दिया जा रहा है।
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भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए National AYUSH Mission और विभिन्न रिसर्च संस्थानों के माध्यम से आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली पर अध्ययन और रिसर्च को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। CCRAS (Central Council for Research in Ayurvedic Sciences) सहित कई संस्थान आयुर्वेद आधारित उपचार पद्धतियों, औषधियों और जीवनशैली प्रबंधन पर कार्य कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल और वेलनेस सेक्टर में आयुर्वेद आधारित हेल्थ मॉडल की स्वीकार्यता भी बढ़ी है।
भारत में तेजी से बढ़ रही हैं बीमारियां
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे देश में, जहां लाइफस्टाइल डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं, वहां केवल उपचार आधारित मॉडल के बजाय preventive and lifestyle-based healthcare approach की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। इसी कारण अब स्वास्थ्य क्षेत्र में डाइट मैनेजमेंट, योग, स्ट्रेस मैनेजमेंट, नियमित मॉनिटरिंग और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर भी जोर बढ़ा है। इसी बदलते हेल्थकेयर परिदृश्य में Dr. Rohit Sane आयुर्वेद आधारित कार्डियक और लाइफस्टाइल डिजीज मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने Madhavbaug के माध्यम से आयुर्वेद, जीवनशैली प्रबंधन और आधुनिक स्वास्थ्य जांच पद्धतियों को जोड़ते हुए कार्डियक हेल्थ पर फोकस करने का प्रयास किया है।
डॉ. रोहित साने का मानना है कि हृदय रोगों और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच लोगों को केवल उपचार ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ विभिन्न हेल्थ कैंप, जागरूकता कार्यक्रम और हेल्थ टॉक्स के माध्यम से लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित जीवनशैली और preventive healthcare के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
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आयुर्वेद के प्रति लोगों का बढ़ा विश्वास
हाल के वर्षों में आयुर्वेद को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती रुचि ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को नई चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के संतुलित उपयोग वाले मॉडल स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में आयुर्वेद आधारित कार्डियक केयर और समग्र स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में हो रहे प्रयास स्वास्थ्य क्षेत्र में नई संभावनाओं को सामने ला रहे हैं।
