

Highlights
उषा उत्थुप को भारी आवाज के कारण स्कूल की म्यूजिक क्लास से बाहर कर दिया गया था।
महज 9 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच पर गाना गाया था।
रेडियो सीलोन के 'ओवलटीन म्यूजिक आवर' से उन्हें पहला बड़ा मौका मिला।
Usha Uthup Birthday Special Story: मशहूर गायिका उषा उत्थुप अपनी भारी, गहरी और दमदार आवाज के लिए जानी जाती हैं। उषा ने भारतीय संगीत जगत में खास मुकाम हासिल किया है। उनके गानों पर आज भी लोग झूमने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस आवाज ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई, कभी उसी आवाज की वजह से उन्हें स्कूल की म्यूजिक क्लास से बाहर कर दिया गया था।
उषा उत्थुप का जन्म 8 नवंबर 1947 को मुंबई में एक तमिल परिवार में हुआ था। उषा आज अपना 79वां जन्मदिन मना रही हैं। उनके घर में बचपन से ही संगीत का माहौल था। माता-पिता को भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ पश्चिमी संगीत सुनने का भी शौक था। इसी वजह से उषा की दिलचस्पी भी धीरे-धीरे संगीत में बढ़ने लगी।
उषा उत्थुप ने मुंबई के बायकुला स्थित सेंट एग्नेस हाईस्कूल से पढ़ाई की। स्कूल के दिनों में वह संगीत सीखना चाहती थीं, लेकिन उनकी आवाज बाकी बच्चों से काफी अलग और भारी थी। इसी वजह से उन्हें एक बार म्यूजिक क्लास से बाहर कर दिया गया। हालांकि, उनकी संगीत शिक्षिका ने उन्हें क्लैपर और ट्रायंगल जैसे म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने का मौका दिया। उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही आवाज आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बनेगी।
उषा ने महज 9 साल की उम्र में पहली बार सार्वजनिक मंच पर गाना गाया था। उनकी बहनों की संगीत में दिलचस्पी के चलते उनकी मुलाकात रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी से हुई। उन्होंने उषा को रेडियो सीलोन के 'ओवलटीन म्यूजिक आवर' में गाने का मौका दिया। यहां उन्होंने 'मॉकिंगबर्ड हिल' गाया और यहीं से उनके संगीत के सफर को नई दिशा मिली।
उषा उत्थुप ने साल 1969 में चेन्नई के नाइन जेम्स नाम के नाइट क्लब से अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की। उनकी पहली प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद उन्होंने कोलकाता, दिल्ली और मुंबई में भी परफॉर्म किया। कोलकाता में उनकी मुलाकात जानी चाको उत्थुप से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने शादी की। साल 1970 में फिल्म 'बॉम्बे टॉकी' से उन्होंने बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की।
उषा उत्थुप ने पॉप, जैज, रॉक और फिल्मी संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने भारत के अलावा विदेशों में भी कई शानदार प्रस्तुतियां दीं। संगीत में उनके योगदान के लिए साल 2011 में उन्हें पद्म श्री और 2024 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। आज उनकी रंगीन साड़ियां, बड़ी बिंदी और दमदार आवाज उनकी खास पहचान बन चुकी हैं।