OTT फैंस को बड़ा झटका! अब 56 दिन बाद ही घर बैठे देख पाएंगे नई फिल्म, जानें क्यों बदले नियम

Telugu OTT New Rule: तेलुगु फिल्मों की ओटीटी रिलीज अब 8 हफ्ते बाद होगी। थिएटर्स में घटती भीड़ को देखते हुए फिल्म चैंबर ने डिजिटल प्रीमियर पर सख्त नियम लागू करने का प्रस्ताव रखा है।
Telugu OTT New Rule
OTT के बदले नियम (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
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8 week OTT Release Window: अगर आप साउथ सिनेमा के फैन हैं और नई फिल्में ओटीटी पर देखने का इंतजार करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। अब तेलुगु फिल्मों की डिजिटल रिलीज को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। तेलुगु फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने थिएटर्स के कारोबार को सुरक्षित रखने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत फिल्मों को ओटीटी पर रिलीज करने से पहले 8 हफ्तों का अंतर रखना अनिवार्य किया जाएगा।

क्या है ओटीटी का नया 8 हफ्ते वाला नियम?

हाल ही में आयोजित कार्यकारी समिति (ईसी) की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। सदस्यों ने चिंता जताई कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जल्दी रिलीज होने के कारण सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या लगातार घट रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, कोई भी नई तेलुगु फिल्म अपनी थिएटर रिलीज के कम से कम 56 दिन बाद ही किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम की जा सकेगी। अब तक ज्यादातर फिल्में एक महीने के भीतर ओटीटी पर उपलब्ध हो जाती थीं। यही वजह थी कि कई दर्शक सिनेमाघरों में जाने की बजाय घर पर ही फिल्म देखने का विकल्प चुनते थे। नए नियम का मकसद इस ट्रेंड को बदलना है।

थिएटर कारोबार को मिलेगा सहारा?

फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इस फैसले से सिनेमाघरों में दर्शकों की वापसी हो सकती है। लंबे समय तक थिएटर एक्सक्लूसिव रखने से फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर मजबूत पकड़ बनाने का मौका मिलेगा। इससे वितरकों और प्रदर्शकों को भी राहत मिल सकती है।

बड़ी फिल्मों का उदाहरण

चैंबर ने इस फैसले के समर्थन में कुछ हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्मों का हवाला भी दिया। कल्कि 2898 एडी और पुष्पा द रूल जैसी फिल्मों ने लगभग 8 हफ्तों का थिएटर रन पूरा करने के बाद ही ओटीटी का रुख किया था। इन फिल्मों ने कई हफ्तों तक बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की, जिससे यह साबित हुआ कि डिजिटल रिलीज में देरी से थिएटर कलेक्शन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

दर्शकों पर क्या होगा असर?

अगर यह नियम पूरी तरह लागू होता है, तो ओटीटी पर नई फिल्में देखने के आदी दर्शकों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि इंडस्ट्री को उम्मीद है कि इससे थिएटर संस्कृति को फिर से मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला दर्शकों की आदतों और फिल्म कारोबार पर कितना असर डालता है।

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