

Sunil Dutt Birth Anniversary Special Story: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर सुनील दत्त का जन्म 1929 को पंजाब में हुआ था, जहां उनका जन्म हुआ वह जगह पाकिस्तान में है। 25 मई 2005 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा था, लेकिन उनकी विरासत आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित है। एक साधारण परिवार से निकलकर बॉलीवुड के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल होने तक का उनका सफर संघर्ष और मेहनत की प्रेरणादायक कहानी है।
सुनील दत्त का असली नाम बलराज दत्त था। उनका जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में हुआ था। जब वह केवल पांच साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। पिता के जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई। छोटी उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ा। बेहतर भविष्य की तलाश में उनका परिवार मुंबई आ गया, जहां पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए। परिवार की मदद के लिए उन्होंने बस कंडक्टर की नौकरी भी की।
कॉलेज के दिनों में सुनील दत्त थिएटर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया करते थे। उनकी प्रभावशाली आवाज लोगों का ध्यान आकर्षित करती थी। एक कार्यक्रम के दौरान रेडियो के अधिकारियों ने उनकी आवाज सुनी और उन्हें रेडियो जॉकी की नौकरी का प्रस्ताव दिया। उस समय उन्हें मात्र 25 रुपये मासिक वेतन मिलता था, लेकिन यह नौकरी उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। रेडियो में काम करते हुए उन्होंने कई फिल्मी सितारों के इंटरव्यू लिए और मनोरंजन जगत से उनका जुड़ाव बढ़ता गया। इसी दौरान उनकी मुलाकात नरगिस से हुई, जो बाद में उनकी जीवनसंगिनी बनीं।
रेडियो में काम करने के दौरान उनकी मुलाकात कई फिल्म निर्माताओं और कलाकारों से हुई। एक इंटरव्यू के दौरान निर्देशक रमेश सहगल उनकी प्रतिभा और व्यक्तित्व से प्रभावित हुए। उन्होंने सुनील दत्त को फिल्मों में आने की सलाह दी। साल 1955 में फिल्म रेलवे प्लेटफ़ार्म से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि उन्हें असली पहचान फिल्म मदर इंडिया से मिली, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।
निर्देशक रमेश सहगल ने बलराज दत्त का नाम बदलकर सुनील दत्त रखा, क्योंकि उस समय अभिनेता बलराज साहनी पहले से प्रसिद्ध थे। आगे चलकर यही नाम भारतीय सिनेमा का बड़ा ब्रांड बन गया। लगभग 48 वर्षों के करियर में सुनील दत्त ने कई यादगार फिल्मों में काम किया और अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किए। फिल्मों के अलावा उन्होंने राजनीति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और कई बार सांसद चुने गए।