Birthday Special: राज कपूर के बाद बॉलीवुड के शोमैन बने सुभाष घई, ‘एम’ नाम की हीरोइनों ने बदली किस्मत

Subhash Ghai Showman of Bollywood: सुभाष घई को राज कपूर के बाद बॉलीवुड का शोमैन कहा जाता है। ‘कालीचरण’ से निर्देशन की पहचान बनाने वाले घई ने ‘हीरो’, ‘राम-लखन’, ‘परदेस’ जैसी हिट फिल्में दीं।
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सुभाष घई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Subhash Ghai Birthday: बॉलीवुड के इतिहास में सुभाष घई का नाम उन चुनिंदा फिल्मकारों में शुमार है, जिन्होंने न सिर्फ सुपरहिट फिल्में दीं, बल्कि हिंदी सिनेमा को एक अलग पहचान भी दी। शानदार संगीत, इमोशनल कहानियां, भव्य सेट्स और मजबूत किरदार सुभाष घई की फिल्मों की यही पहचान रही है। उन्हें राज कपूर के बाद बॉलीवुड का दूसरा “शोमैन” कहा जाता है। लेकिन उनकी फिल्मों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा हमेशा चर्चा में रहा है ‘एम’ अक्षर से शुरू होने वाली हीरोइनों पर उनका भरोसा।

24 जनवरी 1945 को महाराष्ट्र के नागपुर में जन्मे सुभाष घई का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। 1947 के बंटवारे के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया। उन्होंने हरियाणा के रोहतक से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया और इसके बाद पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) से फिल्ममेकिंग की पढ़ाई की। यहीं से उनके सिनेमा के सपनों को पंख मिले।

सुभाष घई का करियर

अपने करियर की शुरुआत उन्होंने अभिनेता के तौर पर की। ‘आराधना’, ‘उमंग’, ‘गुमराह’ और ‘भारत के शहीद’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल निभाए, लेकिन बतौर अभिनेता उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने निर्देशन का रास्ता चुना और यही फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। 1976 में आई ‘कालीचरण’ से सुभाष घई ने बतौर निर्देशक पहचान बनाई।

सुभाष घई की फिल्में

कालीचरण के बाद ‘हीरो’, ‘कर्ज’, ‘विधाता’, ‘राम-लखन’, ‘सौदागर’, ‘खलनायक’, ‘परदेस’ और ‘ताल’ जैसी फिल्मों ने सुभाष घई को सुपरहिट डायरेक्टर की कतार में खड़ा कर दिया। इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि दर्शकों के दिलों पर भी गहरी छाप छोड़ी। सुभाष घई की फिल्मों का एक खास पैटर्न रहा उन्होंने जिन नई हीरोइनों को लॉन्च किया, उनके नाम ‘एम’ अक्षर से शुरू होते थे।

लकी चार्म है ‘एम’ नाम की एक्ट्रेसेस

‘हीरो’ से मीनाक्षी शेषाद्री, ‘राम-लखन’ से माधुरी दीक्षित, ‘सौदागर’ से मनीषा कोइराला और ‘परदेस’ से महिमा चौधरी को लॉन्च किया गया। घई का मानना था कि ‘एम’ नाम उनके लिए लकी चार्म है और इन हीरोइनों ने आगे चलकर इस विश्वास को सच भी साबित किया। निर्देशन के साथ-साथ सुभाष घई ने प्रोडक्शन और तकनीक के क्षेत्र में भी नए प्रयोग किए। 2006 में उन्हें फिल्म ‘इकबाल’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।

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