शनाया कपूर की डेब्यू फिल्म पर मचा बवाल, एक्टिंग को लेकर ट्रोल हुईं एक्ट्रेस

शनाया कपूर ने विक्रांत मैसी के साथ फिल्म आंखों की गुस्ताखियां से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जो रस्किन बॉन्ड की कहानी पर आधारित है। रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं।
शनाया कपूर की डेब्यू फिल्म पर मचा बवाल, एक्टिंग को लेकर ट्रोल हुईं एक्ट्रेस
शनाया कपूर की डेब्यू फिल्म पर मचा बवाल
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Shanaya Kapoor Debut Film: शनाया कपूर ने 11 जुलाई 2025 को अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘आंखों की गुस्ताखियां’ से बॉलीवुड में कदम रख दिया है। फिल्म में वह विक्रांत मैसी के साथ मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। फिल्म के डायरेक्टर हैं संतोष सिंह और इसकी कहानी मशहूर लेखक रस्किन बॉन्ड की कहानी द आईज हैव इट से प्रेरित है। हालांकि फिल्म एक प्यारी प्रेम कहानी पर आधारित है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा मिक्स रिएक्शन के चलते बवाल का रूप ले चुकी है।

शनाया कपूर की 'आंखों की गुस्ताखियां' जैसे ही रिलीज हुई, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स ने रिएक्शन देना शुरू कर दिया। कुछ दर्शकों ने फिल्म को धीमी गति वाली और बोरिंग बताया, जबकि अन्य ने इसकी सिनेमैटोग्राफी और सौम्यता की तारीफ की। मगर सबसे ज्यादा बातें शनाया कपूर की एक्टिंग को लेकर हुईं।

कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा कि शनाया कपूर के चेहरे पर कोई इमोशन नहीं दिखा। पहली फिल्म में थोड़ी बहुत घबराहट तो समझ आती है, लेकिन कैमरा के सामने आत्मविश्वास भी जरूरी है। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि विक्रांत मैसी हमेशा की तरह दमदार थे, पर शनाया को बहुत कुछ सीखना है। हालांकि कुछ दर्शकों ने शनाया का पक्ष भी लिया।

एक फैन ने लिखा कि वो नई हैं, लेकिन उनकी कोशिश दिखती है। धीरे-धीरे सीखेंगी तो बेहतर करेंगी। आंखों की गुस्ताखियां में शनाया और विक्रांत की जोड़ी को लेकर भी मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। किसी ने इसे अनमैचिंग केमिस्ट्री कहा तो किसी ने ताजगी भरी और अलग। ये पहली बार नहीं है जब शनाया को ट्रोल किया गया हो। इससे पहले वह एक म्यूजिक वीडियो में नजर आई थीं, जहां भी उन्हें अनन्या पांडे से तुलना करते हुए सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया था।

शनाया कपूर ने इससे पहले भी ट्रोलिंग पर अपनी बात रखी थी। शनाया ने बताया था कि मैं ऑनलाइन ट्रोलिंग से नहीं डरती। मैं खुद अपने बारे में नेगेटिव कमेंट्स और आर्टिकल्स पढ़ती हूं क्योंकि मुझे जानना जरूरी है कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। जो फीडबैक मेरे काम से जुड़ा होता है, उसे मैं पॉजिटिव तौर पर लेती हूं। वो मुझे बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है।

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