मॉडलिंग से की फिल्मों में एंट्री, झंकार बीट्स से मिली पहचान, फिर भी स्टारडम से दूर ही रहे संजय सूरी

Sanjay Suri Career: संजय सूरी का सफर संघर्ष और संवेदनशील फिल्मों से भरा रहा। कश्मीर से दिल्ली तक कठिनाइयों का सामना करने के बाद उन्होंने फिल्मों में पहचान बनाई, लेकिन बड़ा स्टारडम नहीं मिला।
Sanjay Suri Birthday Special Story Bollywood Actor Jhankaar Beats My Brother Nikhil
संजय सूरी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Sanjay Suri Birthday Special Story: संजय सूरी की जिंदगी सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह संघर्ष, दर्द और हिम्मत की एक सच्ची कहानी है। कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे संजय ने बचपन में ही अपने पिता को आतंकवाद की घटना में खो दिया था। इस हादसे के बाद उनका परिवार कश्मीर छोड़कर दिल्ली आ गया। यह बदलाव उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, जिसने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया।

संजय ने कभी फिल्मों में करियर बनाने की योजना नहीं बनाई थी। वे एक समय स्क्वैश खिलाड़ी थे और खेलों में भविष्य देख रहे थे। लेकिन किस्मत ने उन्हें मॉडलिंग की दुनिया में ला खड़ा किया। विज्ञापनों में पहचान बनाने के बाद उन्हें फिल्म ‘प्यार में कभी-कभी’ से बॉलीवुड में एंट्री मिली। इस फिल्म में दिग्गज अभिनेता राजेश खन्ना की बेटी रिंकी खन्ना और डिनो मोरिया मौजूद थे। हालांकि यह फिल्म सफल नहीं रही, लेकिन संजय को इंडस्ट्री में पहचान मिलने लगी।

संजीदा किरदारों से बनाई अलग पहचान

झंकार बीट्स ने संजय सूरी के करियर को नई दिशा दी। इस फिल्म में उनके अभिनय को सराहा गया और उन्हें एक गंभीर अभिनेता के रूप में देखा जाने लगा। इसके बाद उन्होंने ‘दामन’, ‘पिंजर’ और ‘दिल विल प्यार व्यार’ जैसी फिल्मों में काम किया। माई ब्रदर... निखिल उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक रही। इस फिल्म ने एचआईवी और LGBTQ+ जैसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर बात की, जो उस समय समाज में लगभग अनदेखे थे।

फिल्म निर्माण में नई पहचान

जब अभिनय के बावजूद उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, तो संजय सूरी ने फिल्म निर्माण की ओर कदम बढ़ाया। उनकी प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘आई एम’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि रही। इसके अलावा उन्होंने ‘चौरांगा’ जैसी फिल्मों का भी निर्माण किया, जो सामाजिक मुद्दों को उजागर करती हैं।

ओटीटी और प्रोडक्शन में सक्रियता

आज संजय सूरी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय हैं और अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘एंटीक्लॉक फिल्म्स’ के जरिए नए और सार्थक कंटेंट पर काम कर रहे हैं। वे ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने हमेशा अलग और चुनौतीपूर्ण विषयों को चुना, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वह मुकाम नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। संजय सूरी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सफलता सिर्फ लोकप्रियता से नहीं, बल्कि अपने काम की गहराई और ईमानदारी से भी मापी जाती है।

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