

Sanjay Mishra Struggle Story: भारतीय सिनेमा में अपने खास एक्टिंग और सटीक कॉमिक टाइमिंग से लोगों के दिलों पर छाप छोड़ने वाले संजय मिश्रा की जिंदगी इतनी आसान नहीं रही। उन्होंने 'गोलमाल' और 'धमाल' जैसी कई पॉपुलर फिल्मों में दर्शकों को हंसाकर अपनी मजबूत पहचान बनाई थी।
जब उनका करियर सही दिशा में आगे बढ़ रहा था, तभी उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया। उनके पिता का अचानक निधन हो गया और इस दुखद घटना ने उन्हें भीतर तक पूरी तरह तोड़कर रख दिया।
पिता के जाने के सदमे से बाहर निकलना उनके लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा था। एक्टंग और मायानगरी की चकाचौंध से उनका मन पूरी तरह उठ गया। उन्होंने अचानक फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला किया और बिना किसी को बताए ऋषिकेश चले गए।
वहां उन्होंने अपनी पुरानी पहचान छुपा ली और एक ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया। ढाबे पर वह आम लोगों की तरह बर्तन धोते और ऑमलेट बनाते थे। इस तरह वह गुमनामी के अंधेरे में अपनी जिंदगी बिता रहे थे।
ढाबे पर काम करने के दौरान भी उनकी किस्मत उन्हें वापस फिल्मों की दुनिया में खींच लाई। डायरेक्टर रोहित शेट्टी अपनी नई फिल्म 'ऑल द बेस्ट' की तैयारी कर रहे थे और उन्हें एक खास रोल के लिए संजय मिश्रा की याद आई।
जब रोहित शेट्टी को उनके ऋषिकेश में होने की खबर मिली, तो उन्होंने संजय मिश्रा से कॉन्टेक्ट किया और उन्हें फिल्म में काम करने के लिए मनाया। रोहित शेट्टी के भरोसे पर संजय मिश्रा ने एक बार फिर कैमरे का सामना करने का मन बनाया।
साल 2009 में रिलीज़ हुई फिल्म 'ऑल द बेस्ट' से उन्होंने बड़े पर्दे पर दोबारा कदम रखा। फिल्म में उनके रोल और डायलॉग ने दर्शकों को हंसते-हंसते लोटपोट कर दिया। इस धमाकेदार वापसी के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 'आंखों देखी' तथा 'मसान' जैसी फिल्मों से साबित किया कि वह सिर्फ कॉमेडियन भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं। संजय मिश्रा का यह संघर्षपूर्ण सफर दर्शाता है कि सच्चा कलाकार हर परिस्थिति से उबरकर अपनी कला के बल पर फिर से पहचान बना लेता है।