Samantha Ruth Prabhu को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत, Deepfake और आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का आदेश

Samantha Ruth Prabhu के पर्सनैलिटी और प्राइवेसी राइट्स को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने Google, Meta समेत प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक और Deepfake कंटेंट हटाने का निर्देश दिया।
Samantha Ruth Prabhu Personality Rights
सामंथा रुथ प्रभु बॉम्बे हाईकोर्ट (सौ. डिजाइन फोटो)
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Samantha Ruth Prabhu Personality Rights: साउथ फिल्म इंडस्ट्री की दिग्गज एक्ट्रेस सामंथा रुथ प्रभु को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सामंथा प्रभु को लेकर एक फैसला लिया है।

दरअसल सामंथा रुथ प्रभु ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज सामंथा रुथ के पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर अंतरिम आदेश पारित किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गूगल, मेटा समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और बारी पक्षों को एक्ट्रेस से जुड़े आपत्तिजनक और डीपफेक कंटेट को हटाने का आदेश दिया है।

डीपफेक और मॉर्फ्ड फोटोज के खिलाफ उठायी आवाज

सामंथा रुथ प्रभु की ओर से उनका पक्ष रख रहे एडवोकेट रश्मिन खांडेकर ने कोर्ट के सामने कई वेबसाइट्स, पोर्नोग्राफिक पोर्टल्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और AI चैटबॉट्स का जिक्र किया।

उनके द्वारा दलील की गई थी कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर एक्ट्रेस की फोटोज, वीडियो, ऑडियो और उनकी शक्ल से मिलती-जुलती मॉर्फ्ड और डीपफेक कंटेट का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है। मामले में अनजान समर्थन यानी जॉन डो को भी प्रतिवादी बनाया गया था।

खांडेकर ने कहा कि वादी मुख्य रूप से साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की एक स्टार है, लेकिन उसने हिंदी बॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है। वह एक फिल्म फेयर अवार्ड विनर है। वह साउथ इंडस्ट्री की एक मेगा स्टार है। मीडिया में भी उसकी अच्छी-खासी मौजूदगी है।

डिफेंडेंट्स में वे वेबसाइट्स भी शामिल हैं जिन्होंने उसके एआई से बने मॉर्फ्ड अश्लील फोटो, वीडियो और यहां तक ​​कि ऑडियो क्लिप भी बनाए हैं। कुछ पोर्नोग्राफिक वेबसाइट्स ने एआई की मदद से उसके मॉर्फ्ड वीडियो और फोटो बनाए हैं। एआई कुछ भी कर सकता है जिसका डिफेंडेंट्स गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या कहा?

बॉम्बे हाईकोर्ट के सिंगल जज की बेंच में शामिल जस्टिस माधव जामदार रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री पर सोचते हुए कहा कि सामंथा प्रभु के पर्सनैलिटी और प्राइवेसी के अधिकार, जो भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) और आर्टिकल 21 से मिलते हैं, और कॉपीराइट एक्ट के तहत सुरक्षित उनके नैतिक अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है।

जस्टिस जामदार ने आगे कहा कि वादी भारत के सबसे जाने-माने एक्टर और परफॉर्मर में से एक हैं और उनका करियर तमिल, तेलुगु और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में 15 साल से ज़्यादा का है। रिकॉर्ड में मौजूद चीज़ों से पता चलता है कि मॉर्फ्ड और डीप फेक पोर्नोग्राफिक तस्वीरों से वादी की पर्सनैलिटी, प्राइवेसी और नैतिकता का उल्लंघन हुआ है। उनके पर्सनैलिटी के अधिकार आर्टिकल 19(1)(a) के तहत और जीवन और प्राइवेसी के अधिकार भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत सुरक्षित हैं। एक परफॉर्मर के तौर पर उनके नैतिक अधिकार कॉपीराइट एक्ट के तहत अलग से सुरक्षित हैं। इस तरह, इन सभी अधिकारों का उल्लंघन उस कंटेंट से होता है जिसे उन्होंने मौजूदा कार्रवाई में फ्लैग किया है। इसलिए, अंतरिम राहत देने के लिए एक बहुत मज़बूत प्राइमा फेसी केस बनता है।

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