

Sachin Pilgaonkar Birthday Special: भारतीय सिनेमा में ऐसे कलाकारों की कमी नहीं है जिन्होंने अपनी एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीता, लेकिन सचिन पिलगांवकर का सफर सबसे अनूठा और प्रेरणादायक है। महज 4 साल की उम्र में कैमरे के सामने कदम रखने वाले इस बाल कलाकार ने अपने हुनर से देश के सर्वोच्च मंच पर पहचान बनाई।
इंडस्ट्री में 6 दशक से ज्यादा का लंबा समय बिता चुके सचिन ने केवल अभिनय ही नहीं किया, बल्कि डायरेक्शन, गायन और निर्माण के क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवाया है। उनकी सहज एक्टिंग और मासूम मुस्कान आज भी लाखों दिलों में बसी हुई है।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में सचिन पिलगांवकर का नाम उन चंद कलाकारों में शामिल है जिन्होंने बचपन में ही स्टारडम का स्वाद चख लिया था। साल 1962 में रिलीज हुई मराठी फिल्म 'हा माझा मार्ग एकला' से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी।
उस समय उनकी उम्र काफी छोटी थी, लेकिन अभिनय में परिपक्वता कमाल की थी। पहली ही फिल्म में उनके किरदार और मासूमियत ने हर किसी को उनका कायल बना दिया था।
पहली फिल्म की सफलता के बाद सचिन पिलगांवकर को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली। उनके बेमिसाल एक्टिंग के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने हाथों से नन्हे सचिन को यह राष्ट्रीय पुरस्कार सौंपा था। 5 साल की उम्र में राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार प्राप्त करना किसी भी कलाकार के लिए बेहद फक्र की बात होती है।
जिंदगी के सफर में आगे बढ़ते हुए सचिन की मुलाकात सुप्रिया से एक मराठी फिल्म के सेट पर हुई थी। उस समय दोनों अपने करियर के अहम दौर में थे। काम के दौरान बढ़ी इसी नजदीकी ने धीरे-धीरे प्यार का रूप ले लिया। एक-दूसरे को समझने और जानने के बाद सचिन और सुप्रिया पिलगांवकरने शादी करने का फैसला किया। साल 1985 में यह खूबसूरत जोड़ी हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे के हमसफर बन गए।
आज यह खूबसूरत दंपत्ति अपनी खुशहाल दुनिया में काफी बिजी और संतुष्ट है। दोनों एक होनहार और प्रतिभाशाली बेटी श्रिया पिलगांवकर के माता-पिता हैं। श्रिया भी अपने माता-पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए एक्टिंग के क्षेत्र में लगातार नया नाम और पहचान बना रही हैं। माता-पिता के संस्कार और कला का हुनर उनकी हर परफॉर्मेंस में साफ झलकता है।