पिता के प्यार से महरूम रहीं रेखा, कम उम्र में संभाली जिम्मेदारी, मजबूरी में चुना एक्टिंग का रास्ता

Actress Rekha Career: फिल्मी पर्दे पर अपनी बेमिसाल एक्टिंग से सबका दिल जीतने वाली रेखा का सफर आसान नहीं था। बचपन में आर्थिक तंगी के चलते उन्हें कम उम्र में ही एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा।
Rekha Birthday
रेखा (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • एक्टर जेमिनी गणेशन और एक्ट्रेस पुष्पावली के घर हुआ रेखा का जन्म

  • बचपन से ही पिता का नहीं मिला प्यार, करना पड़ा आर्थिक तंगी का सामना

  • फिल्म उमराव जान से मिली बॉलीवुड में अलग पहचान

Actress Rekha Biography: बॉलीवुड के सुनहरे पन्नों पर जब भी किसी ऐसी एक्ट्रेस का जिक्र होता है जिसने अपनी कातिलाना अदाओं और बेहतरीन एक्टिंग से पीढ़ियों को अपना दीवाना बनाया है, तो उसमें रेखा का नाम सबसे ऊपर आता है।

आज भी उनकी खूबसूरती और ग्रेस के चर्चे कम नहीं होते हैं, लेकिन इस स्टार्डम भरी दुनिया के पीछे एक ऐसा संघर्ष छिपा है जिसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे और हर मुश्किल का डटकर मुकाबला किया।

Rekha Birthday
रेखा(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)

बचपन में पिता का नहीं मिला साथ

रेखा का जन्म साउथ सिनेमा के दिग्गज एक्टर जेमिनी गणेशन और एक्ट्रेस पुष्पावली के घर हुआ था। उनके माता-पिता ने शादी नहीं की थी, जिसके कारण उनके पिता ने कभी उन्हें अपनी कानूनी बेटी के रूप में स्वीकार नहीं किया।

इस कड़वी सच्चाई ने उन्हें बचपन से ही पिता के प्यार से दूर कर दिया। जब वे बहुत छोटी थीं, तभी उनके पिता ने परिवार से पूरी तरह दूरी बना ली। इसके बाद घर की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर आ गई और हालात ऐसे बन गए कि उन्हें मजबूरन पढ़ाई छोड़कर एक्टिंग का रुख करना पड़ा।

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आर्थिक संकट के चलते चुना एक्टिंग का रास्ता

पारिवारिक संकट और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें छोटी उम्र में ही कैमरे के सामने आना पड़ा। उन्होंने महज़ 3 साल की उम्र में साल 1958 में रिलीज़ हुई तमिल फिल्म इंटी गुट्टी में काम किया था।

इसके बाद मां के कहने पर उन्होंने फिल्मों में मुख्य एक्ट्रेस के रूप में अपनी पारी की शुरुआत की और अपनी पहली फिल्म 2 शिकारी के लिए उन्हें 25 हज़ार रुपये फीस मिली थी। उस समय उनका यह कदम शौक नहीं बल्कि परिवार को संभालने की एक बड़ी मजबूरी थी।

सांवले रंग पर सुने ताने, फिर भी नहीं मानी हार

जब उन्होंने साल 1969 में मायानगरी की ओर रुख किया और फिल्म सावन भादो से बॉलीवुड में कदम रखा, तो इंडस्ट्री के लोगों ने उनके सांवले रंग और वजन को लेकर कई तरह की बातें कीं। किसी को यकीन नहीं था कि एक सांवले रंग और अलग कद-काठी वाली लड़की हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बना पाएगी।

लेकिन रेखा ने हार मानने के बजाय खुद को पूरी तरह बदलने का फैसला किया। अपने रहन-सहन, मेकअप के तरीकों और फिटनेस पर कड़ी मेहनत की। इसके साथ ही उन्होंने लगातार 3 महीने तक कड़ी मेहनत करके हिंदी बोलने के अंदाज में सुधार किया।

ऐसे बनीं भारतीय सिनेमा की ब्यूटी क्वीन

उनकी मेहनत रंग लाई और फिल्म दो अंजाने में अमिताभ बच्चन के साथ उनके काम की खूब तारीफे हुई। इसके बाद फिल्म घर ने उनकी जिंदगी को एक बिल्कुल नया मोड़ दिया और उन्हें पहली बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए बेस्ट एक्ट्रेस के रूप में नॉमिनेट किया गया।

साल 1981 में आई फिल्म उमराव जान ने एक्ट्रेस रेखा को सफलता के उस शिखर पर पहुंचा दिया जहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज उनका यह सफर हर उस इंसान के लिए मिसाल है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी अपनी मंजिल खुद तलाशना जानता है।

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