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फिल्म 'रणबाली' में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की केमिस्ट्री सुर्खियों में है।
फिल्म की धीमी रफ्तार और दूसरे हिस्से को लेकर मिले-जुले रिएक्शन सामने आए हैं।
अब फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन पर सबकी नजरें टिकी हैं।
Ranabaali Public Review: बॉक्स ऑफिस में जब भी कोई बड़ी स्टार कास्ट वाली पीरियड ड्रामा फिल्म उतरती है, तो दर्शकों का क्रेज देखने लायक होता है। कुछ ऐसा ही माहौल इन दिनों साउथ सिनेमा में बना हुआ है, जहां फिल्म 'रणबाली' ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। राहुल सांकृत्यान के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं।
यह पहला मौका है जब यह पॉपुलर कपल शादी के बाद पर्दे पर एक साथ रोमांस और संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया पर समीक्षाओं का दौर शुरू हो चुका है, जो यह बताने के लिए काफी है कि दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर किस तरह का मिला-जुला माहौल बना हुआ है।
फिल्म की कहानी दक्षिण भारत में 1876 से 1878 के बीच के विनाशकारी अकाल और ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचारों पर आधारित है। विजय देवरकोंडा ने इसमें सिंगनमला बोब्बिली रणबाली का रोल निभाया है, जो एक विद्रोही योद्धा के रूप में नजर आते हैं। वहीं रश्मिका मंदाना ने उनकी पत्नी जयम्मा की भूमिका अदा की है, जो कहानी को एक मजबूत भावनात्मक आधार देती हैं।
हॉलीवुड एक्टर अर्नोल्ड वोस्लू ने क्रूर ब्रिटिश कमिश्नर का रोल निभाकर फिल्म में खलनायक का दायित्व संभाला है। डायरेक्टर ने इस काल्पनिक ऐतिहासिक गाथा के जरिए यह दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह बीता हुआ कल और सामूहिक स्मृतियां हमारे आज पर कैसा प्रभाव डालती हैं।
फिल्म के पहले हिस्से को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। कई दर्शकों ने विजय देवरकोंडा और रश्मिका की केमिस्ट्री और उनकी एक्टिंग की खुलकर तारीफ की है। फिल्म के इंटरवल से पहले के कुछ सीन इतने रोमांचक हैं कि वे दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रहे हैं।
हालांकि इसके साथ ही एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसने फिल्म की कहानी को सुस्त और नीरस बताया है। कुछ समीक्षकों का यह भी मानना है कि फिल्म का दूसरा हिस्सा काफी अनुमानित हो जाता है, जिससे पर्दे पर होने वाली घटनाओं का रोमांच कम हो जाता है।
फिल्म 'रणबाली' की कमजोरियों की बात करें तो दर्शकों ने इसके दूसरे भाग की रफ्तार और जरूरत से ज्यादा हिंसा पर नाराजगी जताई है। कई सिनेमाप्रेमियों का सोशल मीडिया पर यह कहना है कि फिल्म का दूसरा हिस्सा काफी उबाऊ और थकाऊ साबित होता है।
इसके अलावा, अजय-अतुल द्वारा तैयार किया गया बैकग्राउंड स्कोर भी उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया है, जिससे सीन्स का प्रभाव थोड़ा फीका पड़ जाता है। कलाकारों ने अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी दिखाने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर निर्देशन और खिंची हुई कहानी की वजह से फिल्म की कुल गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
विजय देवरकोंडा के करियर के लिए यह फिल्म एक बहुत बड़ा पड़ाव मानी जा रही है, क्योंकि उन्हें एक बड़ी हिट की तलाश है। रिलीज के पहले दिन टिकट खिड़की पर दर्शकों की ठीकठाक हलचल देखने को मिली है, जो यह दर्शाती है कि स्टार पावर का असर अभी भी बरकरार है। हालांकि क्रिटिक्स से मिले-जुले रिएक्शन मिलने के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ कितनी मजबूत रख पाती है।