

Ramayanam 4000 Crore Budget: भारतीय सिनेमा की हिस्ट्री में अब तक की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी फिल्मों में शामिल 'रामायण' को लेकर दर्शकों के बीच भारी क्रेज देखने को मिल रहा है। नितेश तिवारी के डायरेक्शन और लगभग 4000 करोड़ रुपये के बड़े बजट में बन रही इस महागाथा को लेकर हर दिन नई जानकारियां सामने आ रही हैं।
इस प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि केजीएफ स्टार यश न केवल इस मेगा-बजट फिल्म के सह-निर्माता हैं, बल्कि वे इसमें मुख्य खलनायक यानी लंकापति रावण के किरदार भी निभा रहे हैं। एक बड़े स्तर के एक्टर और प्रोड्यूसर होने के बावजूद उन्होंने खुद के लिए राम की जगह रावण का चुनाव क्यों किया, इस पर यश ने अपनी बात रखी है।
फैंस के मन में यह सवाल लगातार उठ रहा था कि जब यश खुद इस भारी-भरकम प्रोजेक्ट के सह-निर्माता हैं, तो उन्होंने मुख्य नायक की भूमिका क्यों नहीं चुनी। हाल ही में एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में इस पर यश ने साफ किया कि उनके लिए किसी रोल की महत्ता उसके सकारात्मक या नकारात्मक होने से तय नहीं होती।
उन्होंने बताया कि रावण के रोल भारतीय पौराणिक कथाओं में सबसे कठिन, शक्तिशाली और बहुआयामी चरित्रों में से एक है। एक कलाकार के तौर पर वे हमेशा ऐसी चुनौतियों की तलाश में रहते हैं जो उन्हें एक्टिंग की नई गहराइयों को तलाशने का अवसर प्रदान करे।
यश का मानना है कि किसी भी महागाथा को प्रभावशाली बनाने के लिए उसके विरोधी रोल में अपार शक्ति और आकर्षण होना बेहद आवश्यक है। उनका कहना है कि जब तक पर्दे पर रावण जैसा शक्तिशाली और विद्वान विरोधी नहीं होगा, तब तक भगवान राम की महानता, उनके धैर्य और उनके संघर्ष का सही मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
यश ने कहा कि रावण केवल एक दुष्ट राजा नहीं था, बल्कि वह अपार ज्ञान, कला और भक्ति का स्वामी भी था, जिसके भीतर अहंकार ने जन्म ले लिया था। इसी कठिनाइंयों ने उन्हें इस किरदार की तरफ सबसे ज्यादा आकर्षित किया।
फिल्म रामायण में जहां रणबीर कपूर भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं, वहीं साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। यश ने रणबीर कपूर के साथ काम करने और फिल्म में राम-रावण के टकराव को लेकर बेहद खुशी जताई है।
उनका मानना है कि जब दो अलग-अलग एक्टिंग शैलियों के कलाकार एक साथ स्क्रीन शेयर करेंगे, तो वह अनुभव दर्शकों के लिए सिनेमाघरों में अद्भुत होगा। फिल्म के निर्माताओं का लक्ष्य इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करना है, ताकि भारतीय संस्कृति और इस महाकाव्य की भव्यता को वैश्विक मंच पर एक नया मुकाम मिल सके।