‘ये फिल्म नहीं फैसला है’, आदित्य धर की ‘धुरंधर’ पर राम गोपाल वर्मा का दमदार रिएक्शन

Ram Gopal Varma ने धुरंधर को हिंदी सिनेमा के लिए बड़ा बदलाव बताया। उन्होंने आदित्य धर के निर्देशन और रणवीर सिंह की परफॉर्मेंस की तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्म असली सिनेमा को बढ़ावा देती है।
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‘धुरंधर’ पर राम गोपाल वर्मा का दमदार रिएक्शन (फोटो- सोशल मीडिया)
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Ram Gopal Varma Dhurandhar Review: राम गोपाल वर्मा ने आदित्य धर की फिल्म धुरंधर की जमकर तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट शेयर करते हुए इसे हिंदी सिनेमा के लिए बड़ा बदलाव बताया। उनके मुताबिक, यह फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी भी है। राम गोपाल वर्मा ने अपने पोस्ट में लिखा कि ‘धुरंधर’ एक तरह का ‘हॉरर’ है, लेकिन यह दर्शकों को नहीं बल्कि उन फिल्ममेकर्स को डराती है जो सस्ते और दिखावटी सिनेमा पर निर्भर हैं।

राम गोपाल वर्मा ने कहा कि अब वह दौर खत्म हो रहा है जब केवल तेज आवाज, बड़े एक्शन और ओवर-द-टॉप स्टाइल से फिल्मों को हिट बनाया जाता था। वर्मा ने रणवीर सिंह के अभिनय की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस फिल्म ने एक नए तरह के हीरो को जन्म दिया है, जो असली, कमजोरियों से भरा और भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, अब दर्शक ऐसे किरदारों को ज्यादा पसंद करेंगे, न कि दिखावटी ‘सुपरहीरो’ को।

ओवर-द-टॉप एक्शन पर साधा निशाना

राम गोपाल वर्मा ने उन फिल्मों पर भी कटाक्ष किया, जिनमें फिजिक्स की अनदेखी करते हुए अवास्तविक एक्शन दिखाया जाता है। उन्होंने कहा कि अब दर्शक असली दर्द, खून और सच्चे एक्शन को देखना चाहते हैं। पुराने स्टाइल के ‘उड़ते हुए विलेन’ और अविश्वसनीय सीन अब लोगों को नकली लगेंगे। वर्मा ने साफ कहा कि यह फिल्म उन निर्देशकों के लिए चेतावनी है, जो अब भी किरदारों को सिर्फ स्टाइल और लुक के आधार पर गढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि ‘धुरंधर’ में हीरो की ताकत उसकी मानसिक गहराई से आती है, न कि सिर्फ उसकी फिजिकल ताकत से।

धुरंधर सिर्फ फिल्म नहीं, एक फैसला

राम गोपाल वर्मा के अनुसार, ‘धुरंधर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सिनेमा के बदलते दौर का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उस पुरानी सोच को खत्म कर रही है, जिसमें कहानी से ज्यादा दिखावे पर जोर दिया जाता था। उन्होंने अंत में कहा कि अगर फिल्ममेकर्स ने समय के साथ खुद को नहीं बदला, तो उनकी फिल्में दर्शकों के बीच टिक नहीं पाएंगी। आदित्य धर की यह फिल्म हिंदी सिनेमा में नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन सकती है।

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