Prahaar Review: अदालत में दांव-पेच, जिंदगी में संघर्ष, राजकुमार राव ने प्रहार में जमाया रंग

Rajkummar Rao Film Prahaar Rating: राजकुमार राव की फिल्म 'प्रहार' को नवभारत लाइव ने 3.5 स्टार दिए हैं। यह फिल्म 26/11 हमलों के बाद की कानूनी लड़ाई और उज्ज्वल निकम के निजी संघर्ष को दिखाती है।
Film Prahaar Review
प्रहार मूवी रिव्यू(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on: 
Prahaar Rating(3.5 / 5)

Highlights

  • नवभारत लाइव ने ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ को 3.5 स्टार दिए हैं।

  • राजकुमार राव ने सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के किरदार को सधे हुए अभिनय और प्रभावशाली संवादों से जीवंत बनाया है।

  • फिल्म में वामिका गब्बी, ललित प्रभाकर, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी ने अपने किरदारों में प्रभाव छोड़ा है।

Rajkummar Rao Film Prahaar Movie Review: अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उजवल निकम’ 2 घंटे 40 मिनट की अवधि की एक बेहतरीन सिनेमाई पेशकश है। इस फ़िल्म में राजकुमार राव, वामिका गब्बी, ललित प्रभाकर, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी जैसे मंझे हुए कलाकारों की शानदार अदाकारी देखने को मिलती है। नवभारत लाइव ने इस फिल्म को 3.5 स्टार्स की रेटिंग दी है। आखिर किस वजह से इस फ़िल्म को यह रेटिंग मिली है और कलाकारों का प्रदर्शन कैसा रहा, यह सब विस्तार से जानने के लिए आगे समीक्षा पढ़ें।

कुछ लड़ाइयां जीतने के लिए सिर्फ दलीलें नहीं, बल्कि सालों का धैर्य और खुद को झोंक देने वाला जज्बा चाहिए। प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम इसी जज्बे की कहानी है। 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के बाद चली कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म सिर्फ अदालत में इंसाफ की तलाश नहीं दिखाती, बल्कि उस इंसान की जिंदगी में भी झांकती है, जो दूसरों को न्याय दिलाने की कोशिश में अपने ही रिश्तों से दूर होता चला जाता है। अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी यह फिल्म कोर्टरूम के तनाव और निजी जिंदगी के अधूरेपन को एक साथ पिरोती है।

प्रहार की कहानी

फिल्म का केंद्र सरकारी वकील उज्ज्वल निकम और अजमल कसाब का मुकदमा है। कहानी में 1993 के बॉम्बे बम धमाकों से जुड़े कानूनी संदर्भ भी आते हैं। यहां हर दलील का महत्व है और हर कदम के पीछे जवाबदेही तय करने का दबाव। फिल्म की खूबी यह है कि यह कानूनी प्रक्रिया को केवल जीत-हार का खेल नहीं बनाती, बल्कि उसके पीछे छिपे संघर्ष और जिम्मेदारी को भी सामने लाती है।

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फिल्म में दिखेगा कोर्टरूम ड्रामा

निकम की निजी जिंदगी इस कहानी को एक इमोशनल मोड़ देती है। बेटे अनिकेत के साथ उनका रिश्ता दिखाता है कि पेशे के प्रति अटूट समर्पण की कीमत कभी-कभी परिवार को चुकानी पड़ती है। बेटा पिता से मार्गदर्शन और अपनापन चाहता है, लेकिन निकम के लिए अनुशासन और काम की जिम्मेदारी सबसे ऊपर हैं। यही टकराव फिल्म को एक साधारण कोर्टरूम ड्रामा से आगे ले जाता है।

राजकुमार राव का किरदार

राजकुमार राव उज्ज्वल निकम के किरदार में शानदार हैं। उनके अभिनय में अनावश्यक आक्रामकता या फिल्मी हीरो वाला दिखावा नहीं है। सधे हुए संवाद, चेहरे के भाव और अदालत में उनका शांत आत्मविश्वास किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं। खासकर अहम कानूनी बहसों के दौरान उनकी मौजूदगी पर्दे पर तनाव पैदा करती है। राव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह निकम को सिर्फ मजबूत इरादों वाले वकील के रूप में नहीं दिखाते। अदालत में आत्मविश्वास से खड़ा रहने वाला व्यक्ति जब घर पर अपनी भावनाएं जाहिर करने में उलझता है, तो उसका दूसरा पहलू सामने आता है।

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ललित प्रभाकर बने कसाब

ललित प्रभाकर ने कसाब के किरदार में बेचैन करने वाली तीव्रता दिखाई है। उनके किरदार से जुड़े अहम दृश्य कहानी का तनाव बढ़ाते हैं। सिकंदर खेर बचाव पक्ष के वकील के रूप में प्रभावशाली हैं, जबकि जयदीप अहलावत अपने किरदार में गंभीरता और गहराई लाते हैं। वामिका गब्बी ज्योति निकम के रूप में परिवार की इमोशनल दुनिया को मजबूती देती हैं। वहीं, आशीष विद्यार्थी जस्टिस एम. एल. तहिलियानी के किरदार में गरिमा बनाए रखते हैं। पूरी कास्ट कहानी को संभालती है और मुख्य संघर्ष से ध्यान नहीं भटकने देती।

आखिरी सीन तक बांधे रखती है उज्ज्वल निकम की कहानी

प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम एक मजबूत कोर्टरूम ड्रामा है, जो न्याय की लड़ाई के साथ उसके पीछे छूटते निजी पलों को भी अहमियत देती है। हालांकि फिल्म 140 मिनट लम्बी है, लेकिन एक भी डल या बोरिन मोमेंट नहीं है, फिल्म पहले सीन से लेकर आखिरी सीन तक अपनी पकड़ और रफ्तार बनाये रखती है. प्रहार असली घंटनाओ पर आधारित कोर्ट-ड्रामा है, जो हमें कसाब से जुड़े केस की कानूनी प्रक्रिया और उस उज्जवल के संघर्ष की कहानी दिखाता है, जिसके बारे में ज़्यादा लोग नहीं जानते।

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