

Parween Sultana Birthday Special Story: भारतीय शास्त्रीय संगीत की दिग्गज गायिका परवीन सुल्ताना ने अपनी सुरीली आवाज और शास्त्रीय संगीत की गहरी समझ से देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई। उन्होंने फिल्मों के लिए बहुत कम गीत गाए, लेकिन जिन गीतों को अपनी आवाज दी, वे आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। फिल्म ‘कुदरत’ का मशहूर गीत ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
10 जुलाई 1950 को असम के नलबाड़ी जिले में जन्मी परवीन सुल्ताना को बचपन से ही संगीत का माहौल मिला। महज पांच साल की उम्र में उन्होंने संगीत की शिक्षा और नियमित रियाज शुरू कर दिया था। जब उनके हमउम्र बच्चे खेलकूद में व्यस्त रहते थे, तब परवीन घंटों सुरों की साधना करती थीं। उनके पिता ने उन्हें अनुशासन और कठिन मेहनत का महत्व सिखाया, जिसने आगे चलकर उनकी गायकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
महज 12 वर्ष की उम्र में परवीन सुल्ताना ने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी। बाद में उन्होंने कई प्रतिष्ठित गुरुओं से संगीत की शिक्षा प्राप्त की और उस्ताद दिलशाद खान के मार्गदर्शन में अपनी गायकी को और निखारा। पटियाला घराने की प्रमुख गायिका के रूप में उन्होंने देश-विदेश के बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘कुदरत’ के लिए संगीतकार आरडी बर्मन ने उनके शास्त्रीय संगीत पर मजबूत पकड़ और अनोखी आवाज को देखते हुए ‘हमें तुमसे प्यार कितना’ के फीमेल वर्जन के लिए चुना। परवीन सुल्ताना की भावपूर्ण प्रस्तुति ने इस गीत को कालजयी बना दिया। आज भी यह गीत भारतीय फिल्म संगीत के सबसे बेहतरीन रोमांटिक गीतों में गिना जाता है।
‘हमें तुमसे प्यार कितना’ की अपार सफलता के लिए परवीन सुल्ताना को फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्होंने ‘पीतल की मेरी गगरी’, ‘कौन गली गयो श्याम’ और ‘आन मिलो सजना’ जैसे कई यादगार गीतों को भी अपनी आवाज दी। हालांकि उन्होंने फिल्मी दुनिया में सीमित काम किया, लेकिन हर गीत में उनकी शास्त्रीय गायकी की गहराई साफ महसूस की जा सकती है। भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1976 में पद्मश्री और 2014 में पद्म भूषण से सम्मानित किया।