नेहरू भी हो गए थे भावुक, सिर्फ 1 रुपये में गाया गाना, जानें मोहम्मद रफी की दरियादिली की कहानी

Mohammed Rafi Death Anniversary: गायक मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर जानिए उनकी जिंदगी के प्रेरणादायक और अनसुने किस्से। 13 साल की उम्र में पहला मंच और नेहरू को भावुक कर देने वाली उनकी गायकी आज भी अमर है।
Mohammed Rafi Death Anniversary Special Story Unknown Facts
मोहम्मद रफी (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Mohammed Rafi Death Anniversary Special Story: भारतीय संगीत के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी ने रोमांस, दर्द, भक्ति या देशभक्ति, हर तरह के गीतों को अपनी गायकी से अमर बना दिया। 31 जुलाई 1980 को महज 55 वर्ष की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी आवाज आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में जिंदा है। उनकी पुण्यतिथि पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे दिलचस्प किस्से, जिन्होंने उन्हें एक महान गायक के साथ-साथ एक बेहतरीन इंसान भी बनाया।

24 दिसंबर 1924 को पंजाब के कोटला सुल्तान सिंह गांव में जन्मे मोहम्मद रफी का बचपन साधारण माहौल में बीता। उनके परिवार में संगीत की कोई परंपरा नहीं थी, लेकिन गांव में रोज गुजरने वाले एक सूफी फकीर की मधुर आवाज ने उनके मन में संगीत के प्रति गहरा लगाव पैदा कर दिया। रफी घंटों उस फकीर को सुनते और फिर उसकी नकल करते हुए खुद रियाज किया करते थे। यही उनकी संगीत यात्रा की शुरुआत बनी।

13 साल की उम्र में मिला पहला बड़ा मौका

साल 1937 में लाहौर की एक प्रदर्शनी के दौरान मशहूर गायक के.एल. सहगल को प्रस्तुति देनी थी, लेकिन बिजली चले जाने के कारण उन्होंने गाने से इनकार कर दिया। ऐसे में आयोजकों ने 13 वर्षीय रफी को मंच पर भेजा। उनकी सुरीली आवाज ने वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कहा जाता है कि सहगल भी उनकी प्रतिभा से बेहद प्रभावित हुए और उनके उज्ज्वल भविष्य की भविष्यवाणी की।

संगीत बना इबादत, दौलत नहीं

मोहम्मद रफी के बड़े भाई नाई की दुकान चलाते थे, जहां रफी भी मदद करते थे। लेकिन उनका मन हमेशा सुरों में ही रमा रहता था। उनकी प्रतिभा को पहचानने वाले लोगों ने उन्हें संगीत की शिक्षा दिलाई और यहीं से उनका पेशेवर सफर शुरू हुआ। रफी साहब अपनी सादगी और दरियादिली के लिए भी मशहूर थे। कई बार उन्होंने केवल एक रुपये में भी गाने रिकॉर्ड किए।

नेहरू भी हुए थे रफी की आवाज के मुरीद

महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने वाला गीत 'सुनो सुनो ऐ दुनिया वालों, बापू की ये अमर कहानी' रफी साहब की आवाज में इतना लोकप्रिय हुआ कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने निवास पर विशेष प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया। वहीं फिल्म दोस्ती के मशहूर गीत 'चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे' को सुनकर नेहरू की आंखें भी नम हो गई थीं।

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