

Mehboob Khan Birth Anniversary Special: हिंदी सिनेमा के इतिहास में महबूब खान का नाम उन फिल्मकारों में लिया जाता है, जिन्होंने अपने संघर्ष और प्रतिभा के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में खास मुकाम हासिल किया। 9 सितंबर 1907 को गुजरात के बिलिमोरा में एक पुलिस कॉन्स्टेबल के घर जन्मे महबूब खान को बचपन से ही अभिनेता बनने का शौक था। हालांकि, उनके पिता फिल्मों के खिलाफ थे और बेटे के इस सपने को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे।
फिल्मों का जुनून महबूब खान पर इस कदर सवार था कि वह ट्रेन से सफर सिर्फ फिल्में देखने के लिए किया करते थे। 16 साल की उम्र में उन्होंने हीरो बनने के सपने के साथ घर छोड़कर बॉम्बे का रुख किया। लेकिन यहां उन्हें काम नहीं मिला। जब उनके पिता को इसकी जानकारी हुई तो वह उन्हें वापस गांव ले आए। दोबारा घर से न भागें, इसलिए परिवार ने कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी। महबूब ने कुछ समय के लिए अपने सपने को पीछे छोड़ दिया, लेकिन किस्मत उन्हें दोबारा फिल्मों की दुनिया में ले आई।
प्रोड्यूसर और घोड़ों की सप्लाई करने वाले नूर मोहम्मद से मुलाकात के बाद महबूब को दोबारा बॉम्बे जाने का मौका मिला। नूर ने उन्हें अपने अस्तबल में घोड़ों की नाल ठोकने का काम दिया। इसी दौरान महबूब महज 3 रुपये लेकर अपनी किस्मत आजमाने निकल पड़े। एक दिन वह एक फिल्म की शूटिंग देखने पहुंचे, जहां निर्देशक चंद्रशेखर से उनकी मुलाकात हुई। महबूब ने अपने अभिनेता बनने के सपने के बारे में बताया।
महबूब ने बॉम्बे फिल्म स्टूडियो में छोटे-मोटे काम से शुरुआत की। बाद में उन्हें साइलेंट फिल्म में असिस्ट करने का अवसर मिला। काम न मिलने पर उन्होंने इंपीरियल फिल्म कंपनी में एक्स्ट्रा के तौर पर भी काम किया। जब आलम आरा बनने वाली थी, तब उन्हें हीरो बनाने की बात हुई, लेकिन बाद में यह भूमिका मास्टर विट्ठल को मिल गई। इसके बाद महबूब ने अभिनय करियर की बजाय लेखन और निर्देशन को अपना रास्ता बनाया। साल 1935 में उन्हें अल हिलाल निर्देशित करने का मौका मिला।
साल 1940 में महबूब खान ने औरत बनाई थी। दो साल बाद उन्होंने अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर इसी फिल्म की अभिनेत्री सरदार अख्तर से शादी कर ली। पहली शादी से उनके तीन बेटे थे। दूसरी शादी के बाद उन्होंने खुद की संतान की बजाय साजिद खान को गोद लिया। साजिद खान आगे चलकर अभिनेता बने और महबूब खान के नाम को एक नई पहचान से जोड़ा।