

Highlights
मन्ना डे ने ‘एक चतुर नार’ और 'ऐ मेरी जोहरा जबीं' जैसे सदाबहार गाने गाए।
मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था और उनका जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था।
शास्त्रीय संगीत पर मजबूत पकड़ के कारण मन्ना डे की गायकी बाकी गायकों से अलग थी।
Manna Dey Death Anniversary Special: हिंदी सिनेमा को ‘एक चतुर नार’, ‘ऐ मेरी जोहरा जबीं’ और ‘लागा चुनरी में दाग’ जैसे सदाबहार गाने देने वाले दिग्गज गायक मन्ना डे की आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसी है। शास्त्रीय संगीत पर मजबूत पकड़ और मुश्किल गानों को सहजता से गाने की कला ने उन्हें बाकी गायकों से अलग पहचान दिलाई। मन्ना डे की प्रतिभा के कायल मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गज भी थे।
मन्ना डे का जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता में हुआ था। उनका असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। बचपन से ही उन्हें संगीत में दिलचस्पी थी, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह वकील बनें। इसके बावजूद मन्ना डे ने संगीत की राह चुनी। उन्होंने अपने चाचा कृष्ण चंद्र डे और उस्ताद दाबिर खान से संगीत की शिक्षा हासिल की। हिंदी फिल्मों में उन्होंने 1947 में आई फिल्म ‘तमन्ना’ से गायकी की शुरुआत की।
मन्ना डे की खासियत थी कि वह शास्त्रीय संगीत पर आधारित कठिन गानों को भी बखूबी गाते थे। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, गुजराती, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और असमिया जैसी भाषाओं में भी गाने गाए। अपने लंबे करियर में उन्होंने हजारों गीतों को आवाज दी। मन्ना डे की गायकी का सम्मान दूसरे दिग्गज गायक भी करते थे। उनसे जुड़ा एक चर्चित कथन है कि मोहम्मद रफी ने उनके गीतों की तारीफ करते हुए कहा था कि वह खुद मन्ना डे के गाने सुनना पसंद करते हैं। उनकी प्रतिभा को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्म विभूषण से भी नवाजा।
मन्ना डे की जिंदगी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा लखनऊ का बताया जाता है। जानकारी के मुताबिक, वह चारबाग रेलवे स्टेशन के पास आयोजित होने वाले एक संगीत कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम से पहले आयोजक कथित तौर पर गायब हो गए और दर्शक इंतजार करते रह गए। इससे नाराज लोगों ने पुलिस में शिकायत कर दी।
कार्यक्रम में मन्ना डे को आमंत्रित किया गया था, इसलिए पुलिस ने उनसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। बाद में दूसरे गायकों और रंगकर्मियों ने मामले को सुलझाने में मदद की और मन्ना डे को राहत मिली। इस घटना ने दिखाया कि कभी-कभी किसी कार्यक्रम की अव्यवस्था में कलाकारों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
मन्ना डे ने अपनी गायकी से हिंदी सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी। उनकी आवाज, सुरों पर पकड़ और संगीत के प्रति समर्पण आज भी नई पीढ़ी के गायकों के लिए प्रेरणा है। उनके सदाबहार गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।