

Mahakavya: Shri Ramayan Katha Movie Review: 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई और निर्देशक अभिषेक सिंह द्वारा बनाई गई यह फिल्म रामायण की मूल आत्मा को पूरी ईमानदारी से स्क्रीन पर उतारती है। फिल्म को नवभारत की ओर से 3 स्टार्स मिले हैं।
निर्देशक ने बिना किसी गैर-ज़रूरी आधुनिक बदलावों के किरदारों के आंतरिक सफर और उनके आपसी संबंधों की गहराई को उभारने पर ध्यान केंद्रित किया है। हालांकि, यही सादगी कभी-कभी एक बड़े सिनेमाई कैनवास की कमी भी महसूस कराती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका मुख्य अभिनय है। श्री राम के रूप में देव शर्मा शांत और सौम्य नज़र आते हैं, जो चिल्लाते हुए संवादों के बजाय अपनी आँखों के भावों और ठहराव से किरदार की गरिमा को बखूबी बनाए रखते हैं। माता सीता के किरदार में अंजलि अरोड़ा का प्रदर्शन बेहद सहज है, जो राम और सीता के दृश्यों में भावनात्मक संवेदनशीलता को जीवंत करता है।
वहीं लक्ष्मण के रूप में शील वर्मा भाई के प्रति निष्ठा और समर्पण दर्शाते हैं, जबकि निर्भय वाधवा हनुमान के रूप में अपनी ऊर्जा और भक्ति से हर दृश्य में जान फूंक देते हैं। रावण के किरदार में रजनीश दुग्गल अपनी आक्रामकता और दमदार उपस्थिति से कहानी के मुख्य संघर्ष को बहुत मजबूत बनाते हैं। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के स्थानीय कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को एक सच्चा और क्षेत्रीय रंग प्रदान करती है।
तकनीकी पहलू की बात करें तो संगीत इस फिल्म की असली धड़कन है। जावेद अली की आवाज़ में ‘सिया राम’ भक्तिमय वातावरण को गहराई देता है, कैलाश खेर का ‘हे हनुमान’ दृश्यों के प्रभाव को बढ़ाता है, और ‘राम जी की सेना’ युद्ध के दृश्यों में ऊर्जा भर देता है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इतना मजबूत है कि बिना संवादों के भी कई भावनात्मक क्षण सीधे दिल को छू जाते हैं। साथ ही, छत्तीसगढ़ के घने जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक लोकेशन्स पर हुआ वास्तविक छायांकन फिल्म को ज़मीन से जुड़ा हुआ एक रियलिस्टिक लुक देता है।
इसके बावजूद, फिल्म तकनीक और दृश्य-प्रभावों के मोर्चे पर थोड़ी ढीली पड़ जाती है। दृश्य-प्रभाव (वीएफएक्स) और कंप्यूटर से बने दृश्यों में सफ़ाई की कमी साफ झलकती है, जो एक विशाल पौराणिक कथा की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
कहीं-कहीं कथानक की तेज़ गति के कारण दर्शकों को गहरी भावनाओं को पूरी तरह महसूस करने का अवसर नहीं मिल पाता। इन कमियों के बावजूद, देव शर्मा और रजनीश दुग्गल के बीच का टकराव और मजबूत बैकग्राउंड संगीत फिल्म के अंतिम दृश्य को बांधकर रखता है।
कुल मिलाकर, ‘महाकाव्य श्री रामायण कथा’ कोई हाई-टेक विजुअल स्पेक्टेकल भले न हो, लेकिन अपने अभिनय, सुरीले संगीत और नीयत की ईमानदारी के कारण एक बार देखने लायक फिल्म बनती है।