सफेद साड़ी और सोने की पायल थी लता मंगेशकर की खास पहचान, 33 साल की उम्र में झेला था मुश्किल दौर

Lata Mangeshkar Song: लता मंगेशकर ने हजारों गीतों को अपनी आवाज दी और भारत रत्न समेत कई सम्मान हासिल किए। सफेद साड़ी, सोने की पायल और सादगी उनकी पहचान थी, जबकि उनके गीत आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
Lata Mangeshkar Life Story
लता मंगेशकर(फाइल फोटो)
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Lata Mangeshkar Life Story: भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर का नाम भारतीय संगीत के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा। अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज से उन्होंने कई दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। 28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर का 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उनकी पुण्यतिथि पर उनके जीवन और करियर से जुड़ी कई ऐसी बातें याद की जाती हैं, जो उनकी शख्सियत को और खास बनाती हैं।

लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती और संस्कृत समेत कई भाषाओं में गाने रिकॉर्ड किए। उनके नाम हजारों गीतों का रिकॉर्ड दर्ज है। उनकी किताब 'लता समग्र' के मुताबिक, उन्होंने 5,328 हिंदी फिल्मी गाने, 198 गैर-फिल्मी गाने और 127 ऐसे गाने रिकॉर्ड किए थे, जो रिलीज नहीं हो पाए। उनकी आवाज का जादू सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। देश-विदेश में उनके गाने आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

33 साल की उम्र में झेला मुश्किल दौर

लता मंगेशकर के जीवन में एक ऐसा दौर भी आया था, जब उनकी जान लेने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई थी। बताया जाता है कि करीब 33 साल की उम्र में उन्हें कथित तौर पर जहर दिया गया था। एक इंटरव्यू में लता ने इस मुश्किल दौर का जिक्र किया था। इलाज के बाद वह धीरे-धीरे स्वस्थ हुईं और दोबारा अपने संगीत करियर पर ध्यान दिया।

सफेद साड़ी और सोने की पायल थी पहचान

लता मंगेशकर की सादगी भी उनकी पहचान का हिस्सा थी। वह अक्सर सफेद साड़ी में नजर आती थीं। उन्होंने बताया था कि रंगीन कपड़े पहनना उन्हें सहज नहीं लगता था और सफेद साड़ी पहनकर उन्हें शांति महसूस होती थी। इसके अलावा वह पैरों में सोने की पायल भी पहनती थीं। बताया जाता है कि इसे पहनने की सलाह उन्हें एक ज्योतिषी ने दी थी। उन्होंने लिपस्टिक भी नहीं लगाई, क्योंकि उनके पिता को घर की महिलाओं का लिपस्टिक लगाना पसंद नहीं था।

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गानों के जरिए हमेशा रहेंगी याद

लता मंगेशकर के 'करोगे याद तो', 'कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता' और 'दिल ढूंढता है वही फुर्सत के लम्हे' जैसे गीत आज भी सुने जाते हैं। उनकी आवाज ने भारतीय सिनेमा के संगीत को एक अलग पहचान दी। 6 फरवरी 2022 को उनके निधन के बाद भी उनके गीत और संगीत के प्रति योगदान उन्हें हमेशा लोगों के बीच जीवित रखेंगे।

बता दें कि लता मंगेशकर का नाम जब भी लिया जाता है, तो उनकी बहन आशा भोसले के नाम का जिक्र भी खुद बे खुद हो जाता है। आशा भोसले ने कैबरे, गजल, पॉप और एक्सपेरिमेंटल गानों में अपनी खास पहचान बनाई। आशा भोसले ने खुद कई इंटरव्यू में कहा था कि उनके और लता मंगेशकर के बीच कभी कटु प्रतिस्पर्धा नहीं रही, बल्कि यह एक ‘हेल्दी कॉम्पिटिशन’ था।

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