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किशोर कुमार चाहते थे कि उनके घर के हर कमरे में पानी हो और नाव से बेडरूम से डाइनिंग रूम तक जा सकें।
फीस न मिलने पर किशोर दा ने आधे चेहरे पर मेकअप करके शूटिंग की और अपने अनोखे अंदाज से सबको चौंका दिया था।
बॉलीवुड की स्टारडम से दूर किशोर कुमार को अपने शहर खंडवा और वहां की दूध-जलेबी से बेहद लगाव था।
Kishore Kumar Death Anniversary: हिंदी सिनेमा के आसमान पर कई स्टार्स चमके, लेकिन किशोर कुमार जैसी शख्सियत सदियों में एक बार पैदा होती है। उनकी जादुई आवाज ने करोड़ों दिलों पर राज किया और उनकी कॉमिक टाइमिंग ने लोगों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया। वे केवल एक बेहतरीन सिंगर ही नहीं, बल्कि एक्टिंग, डायरेक्शन और संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह थे।
हालांकि बड़े पर्दे के पीछे उनकी पर्सनल लाइफ और उनके स्वभाव से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प पहलू हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर उनके जीवन के उन अनसुने पन्नों को पलटना बेहद रोमांचक है, जो उनकी शख्सियत के अलग ही रंग को दिखाते हैं।
हर बड़े कलाकार की तरह किशोर कुमार का भी यह सपना थी कि उनका अपना एक शानदार घर हो। लेकिन उनका यह सपना आम लोगों से बिल्कुल अलग और बेहद अनोखा था। एक बार उन्होंने एक इंटीरियर डिजाइनर को बुलवाया और अपनी अजीब इच्छा जाहिर की।
वह चाहते थे कि उनके घर के हर कमरे में पानी का बहाव हो, यहां तक कि उनका बेडरूम भी इससे अछूता न रहे। उनकी कल्पना यहीं नहीं रुकी, वह चाहते थे कि उनके बैडरूम में एक छोटी नाव हो, जिसमें बैठकर वह सीधे अपने डाइनिंग रूम तक जा सकें। हालांकि यह नायाब और अनूठा सपना कभी हकीकत में नहीं बदल सका, लेकिन उनकी यह सोच उनके सनकी और मौजी अंदाज को बयां करने के लिए काफी थी।
अपनी फीस और पैसों के लेन-देन को लेकर किशोर दा का अंदाज बेहद निराला था। यदि कोई प्रोड्यूसर समय पर उनकी फीस नहीं देता था, तो वह अनोखे तरीके से अपना विरोध करते थे। एक बार वे केवल आधे चेहरे पर मेकअप करके ही शूटिंग के सेट पर पहुंच गए थे। डायरेक्टर के पूछने पर उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया था कि आधा पैसा मिलने पर मेकअप भी आधा ही होगा।
इसके अलावा, शुरुआती दौर में उन्हें संघर्ष करना पड़ा था, लेकिन जब वह इंडस्ट्री के टॉप सिंगर बन गए, तो उन्होंने एक प्रोड्यूसर से बदला लेने के लिए अजीब शर्त रख दी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें मनाने के लिए प्रोड्यूसर को धोती पहनकर और पान खाते हुए मेज पर खड़ा होना पड़ेगा।
महान सिंगर किशोर कुमार की सिंगिग का दायरा इतना बड़ा था कि वह एक ही गाने में दोनों आवाजें निकाल सकते थे। फिल्म हाफ टिकट का पॉपुलर गाना आके सीधे लगी दिल पे जैसी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें उन्होंने पुरुष और महिला दोनों आवाज अकेले ही गाए थे।
मूल रूप से यह गीत उन्हें स्वर कोकिला लता मंगेशकर के साथ गाना था, लेकिन उनके मौजूद ना रहने पर उन्होंने खुद ही दोनों अंदाज में अपनी आवाज का जादू बिखेर दिया। इसके साथ ही, लता जी के लिए उनके मन में गहरी आदर भावना थी और वह उनके साथ गाए गए गानों के फीस से हमेशा एक रुपया कम ही लेते थे, ताकि उनका सम्मान बना रहे।
बॉलीवुड की चकाचौंध भरी पार्टियों और महफिलों से किशोर कुमार हमेशा दूरी बनाकर रखते थे। उन्हें भीड़-भाड़ के बजाय अकेले समय बिताना बहुत पसंद था और वह अपने बगीचे के पेड़ों से ही बातें किया करते थे। उन्हें अपने होमटाउन खंडवा की दूध-जलेबी से गहरा लगाव था।
वह अक्सर यह बात दोहराते थे कि फिल्मी दुनिया को अलविदा कहने के बाद वह हमेशा के लिए अपने उसी पुराने शहर में जाकर बस जाएंगे। उनकी यही आखिरी इच्छा पूरी हुई और उनका अंतिम संस्कार भी उसी की मिट्टी में संपन्न हुआ, जो उनके अपनी जड़ों से जुड़े होने की सबसे बड़ी मिसाल है।