चार धाम यात्रा के नए नियम से मचा घमासान, सारा अली खान पर भी उठे सवाल, तो कंगना रनौत ने दिया बड़ा बयान

Kangana Ranaut Reaction: केदारनाथ-बद्रीनाथ में दर्शन के नए नियम को लेकर बवाल मच गया है। साथ ही सारा अली खान पर भी सवाल उठे हैं। ऐसे में अब कंगना रनौत ने इसपर रिएक्ट किया है।
Kangana Ranaut On Sara Ali Khan Kedarnath
सारा अली खान और कंगना रनौत
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Kangana Ranaut On Sara Ali Khan Kedarnath: उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में दर्शन को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने नए नियमों के तहत यह तय किया है कि गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले एफिडेविट के जरिए अपनी सनातन आस्था साबित करनी होगी। इस फैसले के बाद से बहस तेज हो गई है, खासकर जब इसका जिक्र बॉलीवुड एक्ट्रेस Sara Ali Khan के संदर्भ में हुआ।

सारा अली खान अक्सर केदारनाथ और अन्य मंदिरों में दर्शन के लिए जाती रही हैं। वह कई बार खुलकर कह चुकी हैं कि वह सभी धर्मों का सम्मान करती हैं और खुद को भारतीय मानती हैं। हालांकि, नए नियमों के अनुसार अब उन्हें भी मंदिर में प्रवेश से पहले एफिडेविट देना पड़ सकता है।

कंगना रनौत ने सारा अली खान पर उठे सवालों पर किया रिएक्ट

इस मुद्दे पर जब बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत से सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि “सब सनातनी हैं।” कंगना के मुताबिक, सनातन का अर्थ ही शाश्वत सत्य है, जिसका न कोई आदि है न अंत। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सच्चाई में विश्वास रखता है, तो उसे एफिडेविट देने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।

वहीं, सारा अली खान ने इस नए नियम पर अभी तक कोई ताजा प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उनका एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 2025 में एक इवेंट के दौरान सारा ने कहा था कि उनकी धार्मिक यात्राएं पूरी तरह निजी हैं और इससे किसी और को कोई मतलब नहीं होना चाहिए। उन्होंने भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बताते हुए कहा था कि लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से सीमाएं बनाते हैं, लेकिन वह इन सीमाओं में विश्वास नहीं करतीं।

क्या है केदारनाथ-बद्रीनाथ दर्शन के नए नियम

गौरतलब है कि अब BKTC ने इस नियम को लागू करने के लिए एक सब-कमिटी का गठन किया है, जो जल्द ही SOP तैयार करेगी। अब तक सारा अली खान सहित कई गैर-हिंदू श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के दर्शन करते रहे हैं, लेकिन नए नियम लागू होने के बाद स्थिति बदल सकती है। इस फैसले ने एक बार फिर आस्था, परंपरा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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