कबीर बेदी (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Kabir Bedi Birthday Special Story: कबीर बेदी भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में शुमार हैं, जिनका करियर सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारतीय सिनेमा के साथ-साथ हॉलीवुड और यूरोप में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। उनकी जिंदगी और करियर उतार-चढ़ाव, साहसिक फैसलों और अंतरराष्ट्रीय सफलता से भरे रहे, जो किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसे लगते हैं।
कबीर बेदी का जन्म 16 जनवरी 1946 को लाहौर में एक सिख परिवार में हुआ था। बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत आ गया। उनके पिता नानक सिंह प्रसिद्ध लेखक थे, जबकि मां फ्रेडा बेदी सामाजिक कार्यकर्ता थीं। ऐसे सांस्कृतिक और बौद्धिक माहौल में पले-बढ़े कबीर का रुझान शुरू से ही कला, साहित्य और अभिनय की ओर रहा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा, जहां उनकी दमदार पर्सनालिटी और गहरी आवाज ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
साल 1971 में कबीर बेदी ने फिल्म ‘हलचल’ से बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने ‘खून भरी मांग’, ‘कुर्बानी’, ‘मैं हूं ना’ और ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि, बॉलीवुड में उन्हें अक्सर ग्रे शेड या निगेटिव किरदारों में देखा गया, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ती रही।
कबीर बेदी का करियर उस वक्त नया मोड़ लेता है, जब उन्होंने यूरोप का रुख किया। इटली की मशहूर टीवी सीरीज ‘सैंडोकन’ में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई। यह शो यूरोप में जबरदस्त हिट हुआ और कबीर बेदी रातों-रात यूरोपियन सुपरस्टार बन गए। इटली, फ्रांस और जर्मनी में उनकी लोकप्रियता किसी लोकल स्टार से कम नहीं थी।
इसके बाद कबीर बेदी ने हॉलीवुड में भी काम किया। 1983 में आई जेम्स बॉन्ड फिल्म ‘ऑक्टोपसी’ में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। यह किसी भी भारतीय अभिनेता के लिए उस दौर में बड़ी उपलब्धि थी। कबीर बेदी सिर्फ अभिनेता ही नहीं रहे। उन्होंने थिएटर, टीवी, विज्ञापन और यहां तक कि फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी काम किया। उन्होंने करण जौहर की फिल्म ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर भी योगदान दिया, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है।