गुरु दत्त को प्यार में मिला था धोखा, डिप्रेशन में आकर छोटी उम्र में उठाया था बड़ा कदम
Guru Dutt Death Anniversary: गुरु दत्त का जन्म 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में हुआ। उनकी जिंदगी व्यक्तिगत संघर्षों से भरी रही। उन्हें प्यार में धोखा मिला, जिससे वे डिप्रेशन और नशे की ओर बढ़ गए।
- Written By: सोनाली झा
गुरु दत्त (सोर्स- सोशल मीडिया)
Guru Dutt Death Anniversary Special Story: हिंदी सिनेमा के महान फिल्ममेकर और अभिनेता गुरु दत्त का नाम भारतीय सिनेमा के उन लेजेंड्स में लिया जाता है, जिन्होंने अपनी फिल्मों से कहानी कहने की शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया। 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में शिवशंकर राव पादुकोण और वसंती पादुकोण के घर जन्मे गुरु दत्त का बचपन का नाम वसंत कुमार था, लेकिन बंगाली संस्कृति के प्रति उनके लगाव और सिनेमा के प्रति जुनून ने उन्हें अपना नाम बदलकर गुरु दत्त रखने के लिए प्रेरित किया।
गुरु दत्त की जिंदगी में कई निर्माता और निर्देशक उनके करीबी रहे, लेकिन उनमें से कुछ का रिश्ता बेहद खास था। इनमें सबसे नजदीकी कड़ी थी श्याम बेनेगल से। श्याम बेनेगल और गुरु दत्त कज़िन थे क्योंकि गुरु दत्त की नानी और श्याम बेनेगल की दादी सगी बहनें थीं। इस खास रिश्ते के चलते श्याम ने गुरु दत्त की कला और फिल्मों से गहरी प्रेरणा ली। श्याम ने एक बार स्वीकार किया था कि गुरु दत्त की कला और उनकी फिल्मों ने उन्हें कभी-कभी ईर्ष्या भी महसूस कराई।
गुरु दत्त की जिंदगी
गुरु दत्त की जिंदगी में एक और शख्स की अहमियत थी, जिन्हें वे प्यार से ‘बकुट मामा’ कहते थे। बकुट मामा, जिनका असली नाम बालाकृष्ण बी बेनेगल था, गुरु दत्त की मां के कज़िन थे। बचपन में गुरु दत्त ने उनके साथ काफी समय बिताया और यह रिश्ता उनके जीवन में गहरे असर वाला साबित हुआ। बकुट मामा ने गुरु दत्त के सृजनात्मक दृष्टिकोण और कला के प्रति उनकी निष्ठा को समझने में मदद की।
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गुरु दत्त को प्यार में मिला धोखा
हालांकि गुरु दत्त ने सिनेमा में अमूल्य योगदान दिया, उनकी व्यक्तिगत जिंदगी उतनी ही संघर्षपूर्ण रही। उन्हें प्यार में धोखा मिला और उन्होंने शराब, सिगरेट और नींद की गोलियों का सहारा लिया। इस संघर्ष और मानसिक अस्थिरता के बीच गुरु दत्त ने केवल 39 साल की उम्र में खुदकुशी कर इस दुनिया को अलविदा कहा। गुरु दत्त के द्वारा बनाई गई फिल्में आज भी उनके जीवन की गहराई और खालीपन की झलक देती हैं। गुरु दत्त की कला, उनके गहरे भाव और उनका समर्पण हिंदी सिनेमा के इतिहास में सदाबहार बने रहेंगे। गुरु दत्त ने हमें दिखाया कि कला और जिंदगी के बीच का संघर्ष कितनी खूबसूरती और दर्द के साथ व्यक्त किया जा सकता है।
