उल्लू, ऑल्ट जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की सख्ती, कंगना रनौत ने किया समर्थन

Government Strictness on OTT Platforms: केंद्र सरकार ने उल्लू, ऑल्ट बालाजी और देसीफ्लिक्स जैसे 26 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और 14 ऐप्स को अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट के चलते बैन कर दिया है।
उल्लू, ऑल्ट जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स पर सरकार की सख्ती, कंगना रनौत ने किया समर्थन
कंगना रनौत (फोटो- सोशव मीडिया)
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Kangana Ranaut Reaction: डिजिटल दुनिया में बढ़ती अश्लीलता पर लगाम कसते हुए केंद्र सरकार ने एक कड़ा कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया है जो लंबे समय से अश्लील, आपत्तिजनक और समाज विरोधी कंटेंट परोस रहे थे। इसमें उल्लू, ऑल्ट बालाजी, एएलटीटी, बिग शॉट्स, नियॉनएक्स वीआईपी और देसीफ्लिक्स जैसे कई नाम शामिल हैं।

सरकार के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म्स पर दिखाया जाने वाला कंटेंट न सिर्फ भारतीय संस्कृति के खिलाफ था, बल्कि यह युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और समाज की नैतिकता को भी नुकसान पहुंचा रहा था। मंत्रालय ने इस बैन को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67A, भारतीय दंड संहिता की धारा 292, और महिलाओं के अशोभनीय प्रस्तुतीकरण अधिनियम, 1986 के तहत लागू किया है।

सरकार की सख्ती

इस कार्रवाई के तहत सरकार ने 14 मोबाइल एप्लिकेशन और 26 वेबसाइटों को ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं। साफ तौर पर सरकार की तरफ से निर्देश जारी कर दिया गया है कि इन सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए। मंत्रालय का साफ निर्देश है कि इन सेवाओं को बिना किसी देरी के भारत में बंद कर दिया जाए। इस कदम का स्वागत कई चर्चित हस्तियों ने भी किया है।

कंगना रनौत का समर्थन

बॉलीवुड अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कहा कि इस फैसले का लंबे समय से इंतजार था। जब समाज में खुलेआम आपत्तिजनक सामग्री परोसी जा रही हो, तब मर्यादा तय करना जरूरी होता है। कंगना रनौत ने सरकार की नीयत और समय पर लिए गए फैसले की सराहना की। वहीं गोरखपुर से बीजेपी सांसद और अभिनेता रवि किशन ने भी इस बैन का समर्थन करते हुए कहा कि डिजिटल फ्रीडम के नाम पर अराजकता की अनुमति नहीं दी जा सकती।

रवि किशन ने कही ये बात

रवि किशन ने कहा कि नियमों की एक लक्ष्मण रेखा होनी ही चाहिए। गौरतलब है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। सितंबर 2024 में सरकार ने इन सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा था और उन्हें कानून के दायरे में काम करने की हिदायत दी थी। बार-बार चेतावनी के बावजूद जब कोई ठोस सुधार नहीं हुआ, तब सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया।

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