

Highlights
दिल्ली में आयोजित पहले चीनी फिल्म महोत्सव 2026 का दो दिवसीय आयोजन संपन्न हुआ।
महोत्सव में भारत और चीन की 10 से ज्यादा फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई।
चीनी फिल्म 'द कंपोजर' को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला।
China Film Festival 2026: भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत बनाने की दिशा में सिनेमा एक अहम भूमिका निभा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ दिल्ली में आयोजित पहले चीनी फिल्म महोत्सव 2026 का समापन हो गया है। दो दिनों तक चले इस आयोजन में भारत और चीन की 10 से ज्यादा फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। इन फिल्मों के जरिए दर्शकों को चीनी सिनेमा, वहां की संस्कृति और कहानियों को करीब से जानने का मौका मिला।
महोत्सव के समापन समारोह में फिल्मों को सम्मानित करने के साथ दोनों देशों के बीच आने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई। महोत्सव का सबसे अहम एलान चीन की राजधानी बीजिंग में होने वाले इंडियन फिल्म फेस्टिवल को लेकर रहा। इसके लिए चीन में भारतीय दूतावास और दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल मिलकर काम करेंगे।
इस आयोजन का मकसद भारतीय फिल्मों को चीन के दर्शकों तक पहुंचाना और उन्हें भारत की कहानियों, संस्कृति और सिनेमा से परिचित कराना है। वहीं, दिल्ली में दूसरे चीनी फिल्म महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा। हालांकि, अभी इसकी तारीखों को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इस तरह दोनों देशों में एक-दूसरे की फिल्मों की स्क्रीनिंग के जरिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने की योजना है।
दिल्ली के फिल्म्स डिवीजन ऑडिटोरियम में आयोजित इस महोत्सव में कई फिल्मों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। चीनी फिल्म 'द कंपोजर' को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला। वहीं, 'द सिंकिंग ऑफ द लिस्बन मारू' को सिलेक्शन कमेटी चॉइस अवॉर्ड से नवाजा गया। भारतीय फिल्म 'द गर्ल विद क्लोज लिप्स' में अभिनय के लिए बाल कलाकार आराध्या को भी सम्मानित किया गया। विजेताओं को ट्रॉफी, गोल्ड मेडल और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया।
इस महोत्सव का आयोजन चीनी दूतावास, दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के सहयोग से किया गया। समापन समारोह में चीनी दूतावास के मिनिस्टर काउंसलर ने NSD, संस्कृति मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहयोग के लिए आभार जताया।
वहीं, महोत्सव के जूरी सदस्य और थिएटर निर्देशक अरविंद गौड़ ने भी भारत और चीन के बीच ऐसे आयोजनों को जरूरी बताया। उनका मानना है कि फिल्में और कला अलग-अलग देशों के लोगों को एक-दूसरे के इतिहास, रहन-सहन और भावनाओं को समझने का अवसर देती हैं। ऐसे में बीजिंग में होने वाला भारतीय फिल्म महोत्सव दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है।