Celina Jaitly Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, भाई विक्रांत ने कानूनी मदद से किया इनकार

Celina Jaitly Brother Vikrant Refuses Legal Help: सेलिना जेटली की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने भाई विक्रांत जेटली के लिए कानूनी मदद और संपर्क की मांग की थी।
Celina Jaitly Brother Vikrant Refuses Legal Help Petition Dismissed Delhi High Court
सेलिना जेटली (फोटो- सोशल मीडिया)
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Celina Jaitly Petition Dismissed: बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली को उस समय बड़ा झटका लगा जब दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में सेलिना जेटली ने अपने भाई विक्रांत जेटली के लिए कांसुलर एक्सेस, कानूनी सहायता और उनसे संपर्क की अनुमति मांगी थी। विक्रांत इस समय संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत में हैं।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि स्वयं विक्रांत जेटली ने अपनी बहन से संपर्क करने और उनकी कानूनी मदद लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को अपनी पत्नी चारुल जेटली के साथ मिलकर सुलझाना चाहते हैं। इस फैसले के बाद सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि उन्होंने यह याचिका अपने भाई की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखते हुए दायर की थी।

निजी जिंदगी में भी मुश्किल दौर

सेलिना जेटली ने कहा कि माता-पिता की अनुपस्थिति में एक बहन होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी थी कि वह अपने भाई के लिए मदद की कोशिश करें। सेलिना जेटली ने यह भी साझा किया कि वह खुद इस समय निजी जीवन में कठिन दौर से गुजर रही हैं, जिसमें उनकी वैवाहिक प्रक्रिया भी शामिल है। इसके बावजूद उन्होंने अपने भाई की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और कानूनी रास्ता अपनाया। सेलिना जेटली ने अदालत और भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें यह जानकर सुकून है कि उनके भाई को पहले ही कानूनी सहायता और कांसुलर एक्सेस मिल चुका है।

कोर्ट और सरकार का जताया आभार

सेलिना जेटली ने भरोसा जताया कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहती है। वहीं, विक्रांत जेटली की पत्नी ने अदालत से इस मामले को निजी रखने की अपील की। अदालत ने पुष्टि की कि संबंधित अधिकारी लगातार विक्रांत जेटली के संपर्क में हैं और मामले की प्रक्रिया जारी है। सेलिना जेटली ने अंत में अदालत ने कहा कि जब संबंधित व्यक्ति स्वयं सहायता लेने से इनकार कर रहा है, तो याचिका को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।

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