रात 2 बजे गजल सुनकर निकल पड़े उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, बेगम अख्तर की आवाज का था ऐसा असर

Bismillah Khan Career: उस्ताद बिस्मिल्लाह खान लता मंगेशकर और बेगम अख्तर के बड़े प्रशंसक थे। वे लता मंगेशकर की गायिकी में कमी खोजने की कोशिश करते थे, लेकिन हर बार उन्हें पूर्णता ही मिली।
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बिस्मिल्लाह खान (फोटो- सोशल मीडिया)
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Bismillah Khan Birth Anniversary: उस्ताद बिस्मिल्लाह खान भारतीय संगीत की वह अमर आवाज हैं, जिन्होंने शहनाई को वैश्विक पहचान दिलाई। उनका जीवन सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि वह गंगा-जमुनी तहजीब और सादगी की मिसाल भी थे। बिहार में जन्मे बिस्मिल्लाह खान का संगीत प्रेम उन्हें बनारस ले आया, जहां मंदिरों में बैठकर उन्होंने घंटों रियाज किया और सुरों को साधा।

बिस्मिल्लाह खान के लिए संगीत ही सबसे बड़ा धर्म था। उन्होंने कभी भी मजहब को अपने सुरों के बीच नहीं आने दिया। मंदिर की चौखट पर बैठकर रियाज़ करने वाले इस महान कलाकार ने हमेशा ‘सच्चे सुर’ की तलाश की। यही वजह थी कि उनके संगीत में एक अनोखी आध्यात्मिकता झलकती थी, जिसने दुनियाभर के श्रोताओं को प्रभावित किया।

बेगम अख्तर की आवाज के दीवाने थे उस्ताद

बेगम अख्तर की गायिकी का बिस्मिल्लाह खान पर गहरा असर था। एक किस्सा काफी मशहूर है कि रात में सोते हुए उन्होंने उनकी गजल ‘दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे’ सुनी और सुबह होते ही यह जानने निकल पड़े कि यह रिकॉर्ड कहां बज रहा था। उनकी नजर में बेगम अख्तर की आवाज में ऐसा जादू था, जिसे हर कोई नहीं साध सकता।

लता मंगेशकर की गायिकी में नहीं मिली कमी

लता मंगेशकर के भी बिस्मिल्लाह खान बड़े प्रशंसक थे। दिलचस्प बात यह है कि वह अक्सर लता जी के गानों को ध्यान से सुनते और उनमें कोई छोटी-सी कमी ढूंढने की कोशिश करते थे। लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ ‘पूर्णता’ ही नजर आती। उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि लता के हर सुर और हर शब्द में एक अद्भुत संतुलन और माधुर्य है, जो किसी और में मिलना मुश्किल है।

दोनों को मिला भारत रत्न का सम्मान

भारतीय संगीत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में बिस्मिल्लाह खान और लता मंगेशकर का योगदान अतुलनीय रहा है। दोनों महान कलाकारों को साल 2001 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया था। यह संयोग भी खास रहा कि दोनों ने अपनी पूरी जिंदगी संगीत को समर्पित कर दी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और लता मंगेशकर जैसे कलाकार सिर्फ नाम नहीं, बल्कि एक विरासत हैं। उनकी साधना, सादगी और संगीत के प्रति समर्पण आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उनके सुर हमेशा गूंजते रहेंगे और भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते रहेंगे।

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