हीरोइन बनने आईं, वैम्प बनकर छाईं, बचपन में ही संभाला घर, फिर भी बच्चे के लिए तरसीं

Bollywood Vamp Bindu: मशहूर वैम्प अभिनेत्री बिंदु का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल है। बचपन में ही परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाली बिंदु ने हीरोइन बनने का सपना छोड़ा और वैम्प किरदारों से पहचान बनाई।
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मशहूर वैम्प बिंदु (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
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Bindu Birth Anniversary: बॉलीवुड में वैम्प की भूमिका को नई पहचान देने वाली अभिनेत्री बिंदु का नाम आते ही 70 के दशक की बोल्ड, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली अदाकारा की छवि सामने आ जाती है। ‘मोना डार्लिंग’ जैसे किरदार से दर्शकों के दिल-दिमाग पर छा जाने वाली बिंदु का सफर आसान नहीं था। कम उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ, निजी जिंदगी के अधूरे सपने और समाज की सोच के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

16 अप्रैल 1941 को गुजरात में जन्मी बिंदु का रिश्ता सिनेमा से जन्म से ही जुड़ा था। उनके पिता नानूभाई देसाई जाने-माने फिल्म निर्माता थे, जबकि मां ज्योत्सना थिएटर अभिनेत्री थीं। हालांकि, पिता चाहते थे कि बिंदु फिल्मों से दूर रहकर डॉक्टर बनें। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। महज 13 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी बिंदु पर आ गई। आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण उन्हें बचपन बहुत जल्दी छोड़ना पड़ा।

बिंदु का बॉलीवुड डेब्यू

कम उम्र में ही उन्होंने तय कर लिया कि परिवार को संभालने के लिए उन्हें काम करना होगा। यही वह मोड़ था, जहां बिंदु ने अभिनय को अपना रास्ता चुना। शुरुआत उन्होंने मॉडलिंग से की और फिर साल 1962 में फिल्म ‘अनपढ़’ से बॉलीवुड में कदम रखा। पढ़ाई पूरी न कर पाने के कारण उन्हें कई बार ‘अनपढ़’ कहकर ताने भी सुनने पड़े, लेकिन बिंदु ने इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

बिंदु का करियर

बिंदु के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट 1970 में आई राजेश खन्ना की सुपरहिट फिल्म ‘कटी पतंग’ रही, जिसमें उन्होंने ‘शब्बो’ का किरदार निभाया। इसके बाद बिंदु ने नेगेटिव और ग्रे शेड वाले किरदारों को अपनी ताकत बना लिया। उस दौर में जब ज्यादातर अभिनेत्रियां हीरोइन बनने की होड़ में थीं, बिंदु ने वैम्प और सशक्त साइड रोल्स को अपनाकर खुद को अलग साबित किया। ‘मोना डार्लिंग’, ‘हाथी मेरे साथी’, ‘जंजीर’, ‘बीवी हो तो ऐसी’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं।

बिंदु की निजी जिंदगी

करीब 160 फिल्मों में काम कर चुकीं बिंदु कई बार बड़े-बड़े सितारों पर भारी पड़ीं। हालांकि, पेशेवर सफलता के बावजूद उनकी निजी जिंदगी अधूरी रह गई। कम उम्र में चंपकलाल झावेरी से शादी करने वाली बिंदु मां नहीं बन सकीं। बच्चे की किलकारी न गूंज पाने का दर्द उन्होंने जिंदगी भर अपने भीतर सहेज कर रखा। बिंदु की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि उस महिला की है जिसने हालातों से समझौता नहीं किया। कम उम्र में जिम्मेदारियों को उठाकर, समाज की सोच को तोड़ते हुए और नेगेटिव किरदारों को ताकत बनाकर उन्होंने बॉलीवुड में अमिट छाप छोड़ी।

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