Bhai Tera Star Hai Movie Review: उलझी हुई कहानी और बोरियत से भरी है राघव जुयाल की ये 'भाई तेरा स्टार है'

Bhai Tera Star Hai Review: राघव जुयाल स्टारर 'भाई तेरा स्टार है' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, लेकिन फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। नवभारत ने फिल्म को 1.5 स्टार दिए हैं।
Raghav Juyal Movie Bhai Tera Star Hai Review Rating
भाई तेरा स्टार है रिव्यू (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Ranbir Kapoor Film Bhai Tera Star Hai Review: विवेक बी अग्रवाल के निर्देशन और निर्माण में बनी फिल्म 'भाई तेरा स्टार है' सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। राघव जुयाल की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में संजय कपूर, बरखा सिंह, निहारिका एनएम, चंदन रॉय सान्याल और निकी वालिया जैसे कलाकारों की बड़ी फौज मौजूद है। कॉमेडी के तड़के और सोशल मीडिया स्टारडम की होड़ पर बनी इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं। नवभारत ने इस फिल्म को 1.5 स्टार्स दिए हैं।

फिल्म 'भाई तेरा स्टार है' की कहानी एक ऐसे महत्वकांक्षी नौजवान के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सोशल मीडिया की दुनिया में रातों-रात बड़ा स्टार बनने का सपना देखता है। जल्द से जल्द शोहरत और फॉलोअर्स हासिल करने की होड़ में वह तरह-तरह के बेतुके हथकंडे अपनाता है और खुद को कई उलझनों में डाल लेता है। हालांकि, आज के डिजिटल युग के लिहाज से यह प्लॉट प्रासंगिक नजर आता है, लेकिन फिल्म की कमजोर और ढीली पटकथा इसे पूरी तरह से पटरी से उतार देती है। कहानी में न तो कोई इमोशनल जुड़ाव है और न ही घटनाएं सही लय में आगे बढ़ती हैं।

फिल्म की अभिनय और निर्देशन

अभिनय के मोर्चे पर, मुख्य भूमिका निभा रहे कलाकारों ने अपनी तरफ से मेहनत तो की है, लेकिन एक बेहद साधारण और कमजोर लेखन के आगे उनकी कोशिशें नाकाम नजर आती हैं। फिल्म के कॉमिक सीन और डायलॉग्स इतने ज्यादा बनावटी लगते हैं कि हंसी आना मुश्किल हो जाता है। निर्देशक ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिंदगी और डिजिटल फेम की अंधी दौड़ पर करारा व्यंग्य कसने का प्रयास किया था, लेकिन बिना किसी मजबूत विजन और सुस्त टाइमिंग के कारण यह प्रयास पूरी तरह दिशाहीन हो जाता है। सह-कलाकारों को भी अपने किरदार में निखार लाने का कोई खास मौका नहीं मिला है।

फिल्म का अंतिम निर्णय

संक्षेप में कहें तो, 'भाई तेरा स्टार है' एक ऐसी आउट-ऑफ-कंट्रोल कॉमेडी फिल्म है जो अपनी नाम के मुताबिक सिनेमाघर में बिल्कुल भी चमक नहीं पाती। राघव जुयाल की फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर भी कुछ खास प्रभाव छोड़ने में असफल रहता है। यदि आप वीकेंड पर एक बेहतरीन, मनोरंजक और ठहाके लगाने वाली कॉमेडी फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको काफी निराश कर सकती है। कमजोर लेखन और फीके हास्य के कारण इसे देखना समय की बर्बादी साबित हो सकता है।

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