Bandits of Chambal लाएगा बीहड़ों की असली कहानी, डकैतों से लेकर पुलिस सुधार तक अनकहा सच आएगा सामने

Producer Swaroop Chaturvedi Film: ‘बैंडिट्स ऑफ चंबल’ फिल्म चंबल के डकैतों की असली कहानियों को सामने लाता है। स्वरूप चतुर्वेदी की यह पहल 1950-80 के दौर के सामाजिक और पुलिस ऑपरेशंस को दर्शाती है।
Producer Swaroop Chaturvedi Film Bandits of Chambal Story The Stories of Phoolan Devi and Malkhan Singh
बैंडिट्स ऑफ चंबल की कहानी (फोटो-सोशल मीडिया)
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Bandits of Chambal Story: चंबल की बीहड़ों की कहानियां लंबे समय से डकैतों, बगावत और संघर्ष के किस्सों के लिए जानी जाती रही हैं। लेकिन इन कहानियों का बड़ा हिस्सा अब तक लोककथाओं और फिल्मों के जरिए ही सामने आया है। अब लेखक और निर्माता स्वरूप चतुर्वेदी अपने नए फिल्म बैंडिट्स ऑफ चंबल के जरिए इस इतिहास के असली और जमीनी पहलुओं को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।

बैंडिट्स ऑफ चंबल को लिटरेरी कंसल्टिंग कंपनी द सनफ्लावर सीड्स के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। यह फिल्म साल 1950 से 1980 के बीच राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले चंबल क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है। इस फिल्म को बनाने का मकसद सिर्फ डकैतों की कहानी दिखाना नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, पुलिस ऑपरेशंस और सुधार की कोशिशों को भी सामने लाना है।

पहली किताब में दिखेगा खास ऑपरेशन

इस सीरीज की पहली किताब ‘द मैन हू वॉन द चंबल्स’ है, जो राजेंद्र चतुर्वेदी के जीवन और काम पर आधारित है। वह 1969 बैच के आईपीएस अधिकारी थे, जिन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने डकैतों के आत्मसमर्पण अभियान की जिम्मेदारी सौंपी थी। राजेंद्र चतुर्वेदी ने पारंपरिक हिंसक तरीकों की बजाय संवाद और पुनर्वास पर जोर दिया। उनकी रणनीति के चलते सैकड़ों डकैतों ने शांतिपूर्ण तरीके से सरेंडर किया, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

फूलन देवी और मलखान सिंह की कहानी

इस फिल्म में कुख्यात डकैत फूलन देवी और मलखान सिंह जैसे नामों की कहानियां भी शामिल हैं। इन कहानियों में न सिर्फ उनके अपराध, बल्कि उनके सामाजिक हालात और सुधार की प्रक्रिया को भी दिखाया जाएगा। स्वरूप चतुर्वेदी के अनुसार, यह फिल्म उनके लिए बेहद व्यक्तिगत है, क्योंकि यह उनके पिता की विरासत से जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि चंबल की कहानियों को सिर्फ ‘डकैतों’ तक सीमित करना गलत है, बल्कि उन्हें ‘बागी’ के रूप में समझना चाहिए, जो परिस्थितियों के कारण उस रास्ते पर चले।

आगे आएंगी और कहानियां

‘बैंडिट्स ऑफ चंबल’ स्टोरीवर्स के तहत आने वाले समय में कई और किताबें और कहानियां सामने आएंगी, जिनमें बड़े ऑपरेशंस और ऐतिहासिक घटनाओं को विस्तार से दिखाया जाएगा। कुल मिलाकर, यह फिल्म चंबल के इतिहास को एक नए नजरिए से पेश करता है, जहां संघर्ष के साथ-साथ सुधार और मानवता की झलक भी देखने को मिलेगी।

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