Awarapan 2 Movie Review: इश्क, दर्द और बदले की आग से भरी इमरान हाशमी की फिल्म कैसी है?

Awarapan 2 Movie Review In Hindi: इमरान हाशमी की फिल्म 'आवारापन 2' सिनेमाघरों में आ चुकी है। शिवम पंडित के रूप में इमरान की वापसी के दम पर यह सीक्वल दर्शकों को प्रभावित करने में सफल रहता है।
Awarapan 2 First Day Review
इमरान हाशमी (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Awarapan 2 First Day Review(3.5 / 5)

Awarapan 2 Film Rating: साल 2007 में आई कल्ट क्लासिक फिल्म आवारापन के लगभग दो दशकों बाद उसके सीक्वल को बड़े पर्दे पर लाना कोई आसान काम नहीं था। किसी सुपरहिट किरदार को इतने सालों बाद दोबारा जिंदा करने में हमेशा एक बड़ा जोखिम छिपा होता है। नितिन कक्कड़ के डायरेक्शन में सजी फिल्म 'आवारापन 2' इस चुनौती को बेहद खूबसूरती से स्वीकार करती है। यह केवल एक कल्ट फिल्म का नाम भुनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि शिवम पंडित की अधूरी और दर्दभरी जिंदगी को आगे बढ़ाने की एक बेहद प्रामाणिक कोशिश है। सिनेमाप्रेमियों के लिए यह सफर एक बार फिर भावनाओं के गहराइयों में उतरने जैसा है, जिसे समीक्षकों ने 3.5 स्टार रेटिंग दी है।

साल 2007 से 2026 तक का खौफनाक और दर्दभरा सफर

कहानी हमें साल 2007 के उस दौर से आगे ले जाकर सीधे साल 2026 में खड़ा करती है। मुख्य किरदार शिवम आज भी अपनी खोई हुई मोहब्बत आलिया की यादों और उसके जाने के गम में घुट-घुट कर जिंदगी गुजार रहा है। इसी बीच उसे आलिया की कब्र के पास एक लावारिस मासूम बच्ची मिलती है, जिसे वह अनाथालय पहुंचा देता है और उसका नाम भी आलिया ही रख देता है।

जब एक फैमिली उस बच्ची को गोद लेता है, तो शिवम को लगता है कि उस मासूम को खुशहाल जिंदगी मिल गई। मगर कहानी में खतरनाक मोड़ तब आता है जब इंटरपोल के जरिए यह खुलासा होता है कि गोद लेने वाले लोग वास्तव में अंतरराष्ट्रीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट के गुर्गे हैं। उस बच्ची की रक्षा और अपने दिल के अपराधबोध को कम करने के लिए शिवम एक बार फिर जुर्म की उसी खौफनाक दुनिया में कदम रखने को मजबूर हो जाता है।

कलाकारों का लाजवाब एक्टिंग और नए किरदारों का खौफ

इस फिल्म की सबसे मजबूत नींव इमरान हाशमी की एक्टिंग है। शिवम पंडित के रूप में उनके चेहरे की वही पुरानी खामोशी, आंखों में छुपा गहरा दर्द और संवादों की गंभीरता दर्शकों को तुरंत बीते दौर में ले जाती है। दिशा पटानी ने ज़ारा के किरदार को बहुत ही सहज और भावुक अंदाज में निभाया है, जो अनजाने में इस खौफनाक जाल में फंस जाती है।

खलनायक जोरावर के रूप में पूरन गब्बी की एंट्री एक सरप्राइज पैकेज की तरह है, जिनकी एक्टिंग में एक नया और अनूठा खौफ देखने को मिलता है। इसके साथ ही एक्ट्रेस शबाना आजमी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से फिल्म के स्तर को और ऊंचा उठाती हैं, जबकि सुविंदर विक्की, अतुल कुमार और अनिरुद्ध रावल जैसे स्थापित कलाकारों ने इस आपराधिक दुनिया के माहौल को पूरी तरह यथार्थवादी बना दिया है।

पुराना रूहानी संगीत और दिल को छू लेने वाले नए बोल

फिल्म का संगीत इसकी सबसे बड़ी आत्मा है, जिसे संवारने का श्रेय मिथुन, अमाल मलिक और जीत गांगुली को जाता है। "तेरा मेरा रिश्ता" और "तो फिर आओ" जैसे सदाबहार नगमों के नए रीक्रिएटेड वर्जन दर्शकों को एक बार फिर पुराने नॉस्टेल्जिया से भर देते हैं।

वहीं दूसरी तरफ अरिजीत सिंह की रूहानी आवाज में गूंजता "ये आवारापन" गाना कहानी के गम्भीर माहौल को और अधिक गहरा बना देता है। सईद कादरी और रश्मि विराग द्वारा लिखे गए अर्थपूर्ण बोल केवल गानों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे पटकथा के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं। थिएटर्स के साउंड सिस्टम पर यह संगीत एक अद्भुत ऑडियो-विजुअल अनुभव पैदा करता है जो सीधे दिल में उतर जाता है।

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क्या बड़े पर्दे पर फिर दिखेगा पुरानी क्लासिक का जादू

कुल मिलाकर देखा जाए तो 'आवारापन 2' पहली फिल्म के मुकाबले अधिक भव्य, तेज रफ्तार और व्यावसायिक थ्रिलर का अहसास कराती है। इसके बावजूद यह शिवम के मन के पुराने जख्मों, उसके भीतर सुलगते गुस्से और प्रायश्चित की सच्ची भावना को खोने नहीं देती।

डायरेक्टर नितिन कक्कड़ ने इसे महज एक रीमेक या पुरानी यादों का दोहराव बनने से बचाया है। यदि आप इमरान हाशमी के इंटेंस अवतार, गहरी कहानियों और भावनात्मक थ्रिलर देखने के शौकीन हैं, तो सिनेमाघरों में जाकर इस एक्शन से भरपूर सफर को महसूस करना आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित होगा।

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