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अमिताभ बच्चन को करियर के शुरुआती दौर में रिजेक्शन और फिल्मों की असफलता का सामना करना पड़ा।
साल 1973 में रिलीज हुई 'जंजीर' अमिताभ बच्चन के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी।
'दीवार' और 'शोले' जैसी फिल्मों ने अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का बड़ा सितारा बनाया।
Amitabh Bachchan Success Story: हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन का नाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। अपनी दमदार आवाज, शानदार अभिनय और अनोखे अंदाज से उन्होंने करोड़ों दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। उन्हें बॉलीवुड का 'एंग्री यंग मैन' भी कहा जाता है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।
अमिताभ बच्चन को करियर की शुरुआत में उन्हें कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा और उनकी फिल्मों को भी लगातार असफलता मिली। उन्होंने साल 1969 में फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, शुरुआत में उन्हें अपनी लंबी कद-काठी और उस दौर के पारंपरिक हीरो से अलग व्यक्तित्व के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
अमिताभ बच्चन को फिल्मों में आने से पहले ऑल इंडिया रेडियो में समाचार वाचक के पद के लिए भी अस्वीकार किए जाने का किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। शुरुआती फिल्मों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन अमिताभ ने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार मेहनत की और अपने अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाने की कोशिश जारी रखी।
अमिताभ बच्चन के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साल 1973 में आई फिल्म 'जंजीर' साबित हुई। प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने इंस्पेक्टर विजय खन्ना का किरदार निभाया था। सलीम-जावेद की लिखी कहानी में एक ऐसे पुलिस अधिकारी को दिखाया गया, जो अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता है।
कहा जाता है कि फिल्म के लिए कई बड़े सितारों के नाम पर विचार किया गया था। इसी दौरान अभिनेता प्राण ने अमिताभ बच्चन का नाम सुझाया। प्रकाश मेहरा ने उन्हें मौका दिया और अमिताभ ने अपने अभिनय से इस किरदार को यादगार बना दिया।
1970 के दशक में दर्शकों के बीच एक ऐसे नायक की लोकप्रियता बढ़ रही थी, जो व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाए। 'जंजीर' में अमिताभ का गुस्सैल और गंभीर अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया। फिल्म की सफलता ने उन्हें नई पहचान दिलाई और वह 'एंग्री यंग मैन' के रूप में मशहूर हो गए।
इसके बाद 'दीवार' और 'शोले' जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अमिताभ बच्चन का सफर बताता है कि शुरुआती असफलताएं किसी कलाकार की मंजिल तय नहीं करतीं। मेहनत, धैर्य और सही मौके के साथ उन्होंने हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपनी खास जगह बना ली।