आलोक नाथ की गिरफ्तारी पर रोक, मल्टी लेवल मार्केटिंग फ्रॉड केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत

Alok Nath: आलोक नाथ की गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है बॉलीवुड एक्टर को मल्टी लेवल मार्केटिंग फ्रॉड केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मामले में 9.12 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है।
आलोक नाथ की गिरफ्तारी पर रोक, मल्टी लेवल मार्केटिंग फ्रॉड केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत
अभिनेता आलोक नाथ को मल्टी लेवल मार्केटिंग फ्रॉड केस में सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर रोक
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Multi Level Marketing Fraud Case: फिल्म अभिनेता आलोक नाथ को मल्टी लेवल मार्केटिंग फ्रॉड केस में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इस केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता की याचिका पर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने आलोक नाथ की गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई है। इसी केस में अभिनेता श्रेयस तलपडे को भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने अभिनेता की याचिका पर हरियाणा पुलिस और अन्य को नोटिस जारी किया है।

मुकदमा रद्द करने की मांग 

अब सुप्रीम कोर्ट अभिनेता श्रेयस तलपड़े की याचिका के साथ आलोक नाथ के केस की सुनवाई करेगा। आलोक नाथ और श्रेयस तलपड़े ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को रद्द किए जाने की मांग की है। 

सोनीपत की मल्टी मार्केटिंग फर्म से जुड़ा है मामला 

यह पूरा मामला हरियाणा के सोनीपत की एक मल्टी मार्केटिंग फर्म से जुड़ा है। इसमें हुई धोखाधड़ी के आरोप में फिल्म अभिनेता आलोक नाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस कंपनी ने अभिनेता आलोक नाथ और श्रेयस तलपड़े को अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया था।

9.12 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप 

सोनीपत और लखनऊ दोनों जगह दर्ज की गई एफआईआर में श्रेयस तलपडे, आलोक नाथ समेत 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था। शिकायत में 7 आरोपियों ने कथित तौर पर 45 निवेशकों से 9.12 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी होने की बात कही थी।

एफडी और आरडी जैसी योजना का ऑफर 

एफआईआर के मुताबिक, इस कंपनी का नाम ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी है, जिसने 16 सितंबर 2016 को हरियाणा और लखनऊ समेत कई राज्यों में ठगी का बिजनेस शुरू किया था। यह सोसाइटी मध्य प्रदेश के इंदौर में रजिस्टर्ड बताई गई थी। सोसाइटी में निवेशकों को फिक्स्ड डिपॉजिट और रेकरिंग डिपॉजिट जैसी योजनाओं का ऑफर दिया जाता था। अच्छी ब्याज दरों के लालच से कई लोगों ने इस कंपनी में निवेश किया था। 

ऑफिस अचानक से बंद होने लगे

करोड़ों रुपए हड़पने के बाद पिछले साल नवंबर में सोसाइटी के ऑफिस अचानक से बंद होने लगे, जिसके बाद पीड़ितों ने अलग-अलग जगह इसको लेकर एफआईआर दर्ज कराई। फिलहाल इस कंपनी के संस्थापकों की खोज जारी है। बताया जा रहा है कि पुलिस अभी तक उन्हें पकड़ नहीं पाई है।

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