Reason To Watch Deva: शाहिद कपूर की ‘देवा’ के 6 धमाकेदार एलिमेंट्स, जो इसे बनाते हैं मस्ट-वॉच!
शाहिद कपूर स्टारर फिल्म "देवा" रिलीज हो गई है। फिल्म के लिए उसके फैंस काफी उत्साहित हैं। फिल्म में पुराने में नया तड़का लगाया गया है। आइए जानते हैं फिल्म देखने की 6 बड़ी वजहें जो आपको आखिरी तक बांधे रखने के लिए काफी हैं।
- Written By: अदिति भंडारी
शाहिद कपूर की 'देवा' के 6 धमाकेदार एलिमेंट्स, जो इसे बनाते हैं मस्ट-वॉच! (सौ. सोशल मीडिया)
मुंबई: शहिद कपूर की मच अवेटेड फिल्म “देवा” रिलीज हो गई है। इस फिल्म के लिए फैंस काफी ज्यादा एक्साइटेड थे। फिल्म के आने से पहले इसके गाने और ट्रेलर ने एक बेहतर माहौल बना दिया था। वैसे तो यह फिल्म 12 साल पुरानी साउथ फिल्म से इंस्पायर्ड है पर पुरानी नहीं है। इसका कॉन्सेप्ट नया है।
अभी लोगों के मन में यह सवाल जरूर होगा कि फिल्म को क्यों देखें। तो आइए इन 7 पॉइंट्स से समझते हैं फिल्म को देखने की वजह के बारे में।
1. सस्पेंस से भरपूर
इस फिल्म का ट्रेलर देखकर फिल्म का आकलन नहीं करना चाहिए। फिल्म में सिर्फ एक्शन नहीं है बल्कि इसमें सस्पेंस भी है। फिल्म का सस्पेंस कमाल का है, जो दर्शकों को आखिर तक बांधकर रखने की ताकत रखता है। इस फिल्म में आपको पुरानी कई फिल्मों की झलक देखने को मिलेगी, जिसमें कभी “रेस”, कभी “शरलॉक होम्स”, कभी शाहरुख खान की “बादशाह” और रितेश देशमुख की “बैक चोर” शामिल हैं।
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2. फिल्मी फॉर्मूले पर आधारित
एक समय ऐसा था कि फिल्म का एक फॉर्मूला हुआ करता था, जिसमें कॉमेडी, इमोशन और एक्शन जरूरी होता था। यह फिल्म कुछ उस फॉर्मुले पर आधारित है। फिल्म में “लाडला” जैसा सस्पेंस, “फोर्स” जैसा थ्रिल और “राउडी राठौर” जैसा एक्शन एक साथ देखने को मिलेगा।
3. मलयालम फिल्म का टच
शाहिद कपूर की इस फिल्म में मलयालम फिल्म का असर देखने को मिलता है। फिल्म को मलयालम डायरेक्टर रोशन एंड्र्यूज ने बनाया है और ये उनकी ही फिल्म “मुंबई पुलिस” से इंस्पायर्ड है। “देवा” मलयालम फिल्म की तरह ही बेहतरीन कंटेंट पेश करती है।
4. फिल्म का डायरेक्शन कैसा है?
रोशन एंड्र्यूज ने 90 के दशक की फिल्म पर अभी के ऑडियंस की पसंद का बेहतरीन तड़का लगाया है। उन्हें यह पता था कि उन्हें ऑडियंस के सामने क्या पेश करना है और कैसे पेश करना है, जिसे फैंस पसंद करेंगे। रोशन ने फिल्म में कई ऐसे जरूरी किरदार रखे हैं, जो कहानी का जरूरी हिस्सा न होने के बावजूद जरूरी बन जाते हैं।
5. बेहतरीन रिसर्च के साथ
फिल्म के डायलॉग और सीन कहीं न कहीं फिल्म में एक-दूसरे से मेल जरूर खाते हैं। इसमें शाहिद दो अलग-अलग सोच के साथ नजर आते हैं, जिसमें पहले सीन में एक्टर कुब्रा सैत वाले किरदार में हैं और दूसरे सीन में पुलिस ऑपरेशन में शामिल हो जाते हैं। यह हिंट फिल्म देखने के लिए काफी है।
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6. एक्टिंग और बैकग्राउंड म्यूजिक
फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है इसका बीजीएम। इस फिल्म के गाने कानों को अच्छे लगने वाले हैं। शाहिद की एक्टिंग की बात करें तो वो हमेशा की तरह बेहतरीन हैं। इसमें उनका एटिट्यूड और उनका एंगर साफ नजर आ रहा है। एंग्री होते हुए भी शाहिद एक सीन में भी लाउड नहीं हुए हैं।
