

BJP Victory In WB Assembly Election: पिछले 15 सालों से पश्चिम बंगाल की सत्ता परक काबिज सीएम ममता बनर्जी बंगाल की सत्ता से विदाई तय हो गई है। प्रचंड जीत की तरफ बढ़ रही भाजपा 4 मई, 2026 अब तक तक आए नतीजों में 202 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि TMC की महज 84 सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है। पिछले चुनाव से बाजपा को इस बार 125 सीटों की ज्यादा बढ़त मिली है, जबकि TMC को 126 सीटों पर झटका लगा है।
चुनावी नतीजे बता रहे हैं कि बीजेपी पश्चिम बंगाल के सत्ता के करीब पहुंच चुकी है और 15 साल से सत्ता में बैठी टीएमसी पिछड़ गई है। बंगाल में दो तिहाई बहुमत की तरफ बढ़ रही बीजेपी ने साल 2026 के विधानसभा चुनाव में इतिहास रच दिया है, लेकिन अब सवाल यह उठता है कि साल 2024 से 2026 में ऐसा क्या हुआ कि ममता बनर्जी की पार्टी से जनता का मोहभंग हो गया।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को धूल चटाकर टीएमसी ने 12 सीटों पर समेट दिया था। लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 29 लोकसभा सीटों जीत दर्ज की थी, वहीं साल 2019 लोकसभा चुनाव में टीएमसी महज 22 लोकसभा सीटों पर जीत पाई थी और बीजेपी को 18 लोकसभा सीटों पर जीत मिली थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में TMC ने खोयी जमीन पर दोबारा कब्जा करते हुए 22 से 29 लोकसभा सीटों पर पहुंच गई और 6 सीट गंवाने वाली भाजपा ने दो सालों के अंतराल में ऐसा क्या कर दिया कि टीएमसी को सत्ता से दूर करने में सफल रही।
अब सवाल यह उठता है कि पिछले दो सालों में ऐसा क्या किया कि जिसका खामियाजा ममता बनर्जी को सत्ता गंवाकर चुकाना पड़ा। लगातार 15 सालों तक पश्चिम बंगाल के सियासत की धुरी रहीं ममता बनर्जी की हार का बड़ा कारण गंभीर भ्रष्टाचार, घोटाला और आरजीकर अस्पताल रेप कांड माना जा रहा है। पिछले दो सालों की बात करें तो मंत्रिमंडल के मंत्रियों और पार्टी के नेताओं के उजागर हुए भ्रष्टाचार और सीबीआई-ईडी की छापेमारी में नोटों की बरामदगी से पार्टी की ईमानदार छवि ठेस पहुंची है, जिसका परिणाम चुनाव नतीजों में दिख रहा है।
ममता बनर्जी की बंगाल में करारी हार का कारण हर कोई जानना चाह रहा है, जो चुनावी नतीजे संकेत दे रहे हैं, उससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर वो 'फाइटर' छवि वाली ममता क्यों फेल हो गई? राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो ममता की आक्रामकता जो कभी उनकी ताकत हुआ करती थी, वही उनके खिलाफ हो गई। इसमें रही सही कसर उनके मंत्रियों और पार्टी के नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप और आरजी कर अस्पताल कांड ने पूरी कर दी, जिससे वह सत्ता से बाहर हो गईं।
ममता सरकार में सामने आई शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता और राशन घोटाले से TMC सरकार की छवि खराब हुई, जिसका असर चुनाव के नतीजों पर साफ-साफ दिख रहा है। लेकिन आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज वाली घटना ने उनकी विदाई में निर्णायक भूमिका निभाई है, जिसको लेकर भाजपा वहां की जनता को समझाने में सफल रही कि ममता राज में पश्चिम बंगाल में केवल भ्रष्टाचार नहीं, महिला सुरक्षा बड़ा विषय है। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों मुद्दों को लेकर पार्टी के राज्यव्यापी प्रदर्शनों ने महिला वोटरों टीएमसी से दूर कर दिया।
भाजपा ने चुनाव में आरजी कर अस्पताल कांड जैसे भावनात्मक मुद्दों को अच्छे से भुनाया। पीड़िता की मां और उनके करीबियों को चुनावी मैदान में उतारकर बीजेपी ने बढ़त ले ली। ममता बनर्जी की हार में 'एंटी-इनकंबेंसी' फैक्टर को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। लगभग 15 साल की सत्ता में रही ममता के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी फैक्टर ही था और वोटरों ने बदलाव के लिए वोट किया।