त्रिशंकु विधानसभा बनी तो टीएमसी-बीजेपी के पास क्या रास्ता? बहुमत के लिए क्या करेंगे मोदी और ममता, जानें सब कुछ

बंगाल चुनाव नतीजों से पहले सियासी हलचल बढ़ गई है। Matrize और P-MARQ जैसे सर्वे भाजपा और टीएमसी के बीच कड़ा मुकाबला दिखा रहे हैं, जिससे 'हंग असेंबली' के आसार बन रहे हैं।
West Bengal Politics
राहुल गांधी, PM मोदी और CM ममता (डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

West Bengal Hung Assembly Chance: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों का हर कोई बेसब्री से इंतजार कर रहा है। बंगाल चुनाव रिजल्ट को लेकर आए लगभग सभी एग्जिट पोल्स ने इस बार ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगाया गया है। सभी एग्जिट पोल्स में इस बार किसी एक पार्टी की एकतरफा जीत का संकेत नहीं मिला है। इस बार बेहद कड़ी और संतुलित लड़ाई की तस्वीर दिख रही है।

करीब सभी प्रमुख सर्वे में मुकाबला इतना कांटे का दिख रहा है कि बहुमत के आंकड़े 148 के आसपास दोनों दलों टीएमसी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर बन गई है। ऐसी स्थिति है कि महज 5 से 10 सीटों का उतार-चढ़ाव ही राज्य की सत्ता का फैसला करने वाला है।

क्या कह रहे हैं एग्जिट पोल्स?

अधिकतर एग्जिट पोल्स के रुझान बताते हैं कि बंगाल में इस बार चुनावी मुकाबला पूरी तरह से दो दलों के बीच का हो गया है। एक तरफ सत्तारूढ़ टीएमसी है, तो वहीं दूसरी ओर विपक्षी भाजपा, जिसने पिछले कुछ सालों में राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की लगातार कोशिश कर रही है।

बता दें कि एबीपी के लिए किए गए मैट्रीज सर्वे ने बीजेपी को 146 से 161 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है, जबकि TMC को 125 से 140 सीटें मिल सकती हैं। अगर बाजपा अनुमान के सबसे निचले स्तर यानी 146 सीटों पर रुकती है, तो वह बहुमत से पीछे ही रह जाएगी और राज्य में ‘हंग असेंबली’ की स्थिति बन सकती है।

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल के परिणाम

सोर्स: P-MARQ कुल सीट - 294| बहुमत - 148
पार्टी सीटों का अनुमान
TMC 118-138
BJP 150-175
OTHERS 0

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल के परिणाम

सोर्स: Matrize कुल सीट - 294| बहुमत - 148
पार्टी सीटों का अनुमान
TMC 125-140
BJP 150-175
OTHERS 0

इसी तरह एक अन्य सर्वे एजेंसी PMARQ के आंकड़े भी मुकाबले को कांटे का बता रहे हैं। इस सर्वे में भाजपा को 150 से 175 सीटें तो वहीं टीएमसी को 118 से 138 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। हालांकि यहां भी भाजपा का निचला आंकड़ा (150) बहुमत से 2 सीट ही अधिक है, जो कि दर्शाता है कि जनादेश बहुत नाजुक हो सकता है।

इन सभी एग्जिट पोल्स को देखें तो एक बात साफ है कि बंगाल में ‘हंग असेंबली’ की संभावना काफी मजबूत है। अधिकतर प्रोजेक्शन बीजेपी को 140-160 सीटों के बीच और टीएमसी को 120-140 सीटों के बीच अनुमान लगा रहे हैं। यानी दोनों ही पार्टियां बहुमत के करीब तो हैं, लेकिन उससे ज्यादा ऊपर नहीं दिख रही हैं। बता दें कि एग्जिट पोल केवल संकेत होते हैं और कई बार तो ये वास्तविक नतीजों से बिलकुल उलट साबित होते रहे हैं।

त्रिशंकु विधानसभा बनने पर क्या होगा?

अगर ऐसी स्थिति बनती है कि कोई भी पार्टी 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर सकी, तो इस मामले में राज्यपाल की भूमिका अहम हो जाती है। आमतौर पर राज्यपाल द्वारा सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया जाता है।

west bengal assembly
विधानसभा की फाइल फोटो (Image- Social Media)

अगर भाजपा राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है लेकिन बहुमत से दूर रहती है, तो उसे छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन जुटाना होगा। वहीं टीएमसी को भी कांग्रेस और वाम दलों से समर्थन मांगना पड़ सकता है। कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ही ये संकेत दे चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर पार्टी अपने स्टैंड पर फैसला करेगी।

बता दें कि सरकार बनाने के बाद किसी भी दल या गठबंधन को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। अगर कोई भी सरकार बहुमत नहीं जुटा पाती, तो राष्ट्रपति शासन लागू होने या फिर दोबारा चुनाव होने की संभावना भी बन सकती है, हालांकि ऐसी स्थिति कम ही आती है।

इस बार अलग क्यों हैं चुनाव?

बंगाल चुनाव इस बार पहले के मुकाबले कई मायनों में अलग माना जा रहा है। सबसे बड़ा बदलाव ये है कि मुकाबला इस बार पूरी तरह टीएमसी बनाम बीजेपी हो गया है। एंटी-इंकम्बेंसी वोट कई छोटे-छोटे दलों में बंटे हुए हैं, जिससे मेन लड़ाई दो पार्टियों के बीच सिमट गई है। इसके अलावा इस बार 92 प्रतिशत से अधिक मतदान ये दिखाता है कि मतदाताओं में चुनाव को लेकर भारी उत्साह रहा और दोनों पक्षों ने जमीनी स्तर पर जबरदस्त लामबंदी की है।

west bengal assembly election voting
बंगाल चुनाव (Image- Social Media)

अगर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है लेकिन बहुमत से दूर रहती है, तो उसे सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी, जिससे उसकी सरकार सीमित नियंत्रण वाली होगी।  वहीं अगर टीएमसी बड़ी पार्टी बनती है और बहुमत से दूर रहती है तो उसके लिए ये विपक्षी एकजुटता की परीक्षा होगी। अगर कांग्रेस और वाम दल TMC को समर्थन दे देते हैं, तो वह पीछे रहते हुए भी सत्ता में वापसी कर सकती है।  कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में चुनाव इस बार महज जीत-हार का नहीं, बल्कि बेहद बारीक गणित और सियासी जोड़-तोड़ का खेल बन गया है, जहां अंतिम नतीजे आने तक तस्वीर पूरी तरीके से साफ नहीं होगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com