पार्टी ने दिया धोखा तो बेलापुर विधानसभा से निर्दलीय ताल ठोंकने को मजबूर हुए विजय नाहटा
शिवसेना ने जिस प्रत्याशी को टिकट दिया है, वह पिछले 10 सालों में कोई भी सार्वजनिक हित का काम करने में असफल रहा है। इसीलिए टिकट कटने के बाद वह मैदान में कूद पड़े हैं।
- Written By: विजय कुमार तिवारी
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कई ऐसे प्रत्याशी निर्दलीय तौर पर मैदान में उतरे हैं, जो पार्टी के आलाकमान की वादा खिलाफी के शिकार हुए हैं, उनमें ही एक नाम विजय नाहटा का है, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बेलापुर विधानसभा से अपना नामांकन पत्र दाखिल करके चुनाव मैदान में ताल ठोंक दी है। प्रशासनिक अधिकारी से राजनेता बनने की राह में चल पड़े विजय नाहटा के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव रहा है और पिछले कई सालों से शिवसेना के साथ जुड़कर राजनीति भी कर रहे थे। लेकिन 2014 और 2019 में टिकट कटने के बाद जब 2024 में भी उनका टिकट नहीं मिला तो उनका धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने पार्टी लाइन छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर पड़े। वह अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, क्योंकि शिवसेना ने जिस प्रत्याशी को टिकट दिया है, वह पिछले 10 सालों में कोई भी सार्वजनिक हित का काम करने में असफल रहा है। नवभारत के साथ विजय नाहटा ने साथ खास बातचीत की और अपनी तैयारियों पर चर्चा की।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कई ऐसे प्रत्याशी निर्दलीय तौर पर मैदान में उतरे हैं, जो पार्टी के आलाकमान की वादा खिलाफी के शिकार हुए हैं, उनमें ही एक नाम विजय नाहटा का है, जिन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बेलापुर विधानसभा से अपना नामांकन पत्र दाखिल करके चुनाव मैदान में ताल ठोंक दी है। प्रशासनिक अधिकारी से राजनेता बनने की राह में चल पड़े विजय नाहटा के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव रहा है और पिछले कई सालों से शिवसेना के साथ जुड़कर राजनीति भी कर रहे थे। लेकिन 2014 और 2019 में टिकट कटने के बाद जब 2024 में भी उनका टिकट नहीं मिला तो उनका धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने पार्टी लाइन छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर पड़े। वह अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, क्योंकि शिवसेना ने जिस प्रत्याशी को टिकट दिया है, वह पिछले 10 सालों में कोई भी सार्वजनिक हित का काम करने में असफल रहा है। नवभारत के साथ विजय नाहटा ने साथ खास बातचीत की और अपनी तैयारियों पर चर्चा की।
