बंगाल चुनाव: मेरे पास सबके वोटर कार्ड हैं...खुलेआम मतदाताओं को डरा रहा था TMC का नेता; पुलिस ने किया गिरफ्तार

Bengal Election: चुनाव के बीच बड़ी कार्रवाई मतदाताओं को डराने के आरोप में टीएमसी नेता निर्मल दत्ता गिरफ्तार। कोर्ट ने 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
TMC Leader Arrested
टीएमसी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Action Against TMC Leader: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी माहौल के बीच सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। भारतीय चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन ने मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोपों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व पार्षद निर्मल दत्ता को गिरफ्तार कर लिया है।

यह कार्रवाई बिधाननगर इलाके में कथित रूप से वोटरों को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप में की गई। गिरफ्तारी बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को हुई, जिसने चुनावी माहौल में हलचल मचा दी है।

भाजपा की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

यह पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शरदवत मुखर्जी की शिकायत के बाद सामने आया। उन्होंने 14 अप्रैल को चुनाव आयोग और बिधाननगर पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर निर्मल दत्ता पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया कि दत्ता मतदाताओं को डराने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और महज 24 घंटे के अंदर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

विवादित बयान बना गिरफ्तारी की वजह

रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 अप्रैल को सॉल्ट लेक में आयोजित एक बैठक के दौरान तृणमूल कांग्रेस के पूर्व पार्षद निर्मल दत्ता का एक बयान सामने आया, जिसने विवाद खड़ा कर दिया। कथित तौर पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी है कि इलाके के लोग कहां वोट देते हैं और उनके पास मतदाताओं के आधार कार्ड और वोटर आईडी से जुड़ी जानकारी भी मौजूद है। इस बयान को विपक्ष ने मतदाताओं को डराने और दबाव बनाने की कोशिश के रूप में लिया। इसी आधार पर भाजपा उम्मीदवार ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कदम उठाया।

कोर्ट में पेशी और न्यायिक हिरासत

गिरफ्तारी के बाद निर्मल दत्ता को बिधाननगर कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि दत्ता की पत्नी वर्तमान में बिधाननगर नगर निगम के वार्ड नंबर 38 से TMC की पार्षद हैं। इस कार्रवाई को चुनाव आयोग की सख्ती और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम ने चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज कर दिया है।

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