झारखंड चुनाव: चंपाई सोरेन के गढ़ में होगा महाली का श्री 'गणेश', 'कोल्हान टाइगर' की चाल पर लगेगी ब्रेक, सामने आए नए समीकरण

चंपाई सोरेन की सीट सरायकेला में यह प्रतिशत 71.54 रहा है। वोटिंग के बीच चल रही चर्चाओं में यह कहा जा रहा है कि इस बार कोल्हान टाइगर को यहां शिकस्त खानी पड़ सकती है।
झारखंड चुनाव: चंपाई सोरेन के गढ़ में होगा महाली का श्री 'गणेश', 'कोल्हान टाइगर' की चाल पर लगेगी ब्रेक, सामने आए नए समीकरण
चंपाई सोरेन (सोर्स-सोशल मीडिया)
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रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण के वोटिंग खत्म हो चुकी है। पहले फेज में राज्य की 43 सीटों पर मतदान हुआ। इन 43 सीटों में एक सीट ऐसी है जिसे सूबे की हॉट सीट्स में सिर-ए-फेहरिस्त माना जाता है। यह सीट सरायकेला है जहां सूबे के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन मैदान में हैं। वह यहां से 6 बार विधायक रह चुके हैं। लेकिन इस बार की कहानी कुछ अलग बताई जा रही है।

झारखंड में पहले चरण में अच्छी संख्या में लोग वोट करने के लिए घरों से बाहर निकले हैं। ख़बर लिखने जाने तक राज्य में कुल 65.78 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई है। चंपाई सोरेन की सीट सरायकेला में यह प्रतिशत 71.54 रहा है। वोटिंग के बीच चल रही चर्चाओं में यह कहा जा रहा है कि इस बार कोल्हान टाइगर को यहां शिकस्त खानी पड़ सकती है।

चंपाई का गढ़ है सरायकेला

सरायकेला विधानसभा सीट ही नहीं बल्कि पूरा कोल्हान चंपाई सोरेन का गढ़ माना जाता है। इसीलिए चंपाई सोरेन को भी 'कोल्हान टाइगर' के नाम से जाना जाता है। चंपाई अगर साल 2000 को छोड़ दिया जाय तो सरायकेला सीट पर वह 1991 से लगातार जीत दर्ज करते आए हैं। लेकिन इस बार खुद उनके लिए ही समीकरण मुश्किल नज़र आ रहे हैं।

गणेश महाली कर सकते हैं खेल

राजनीतिक गलियारों में चर्चा के मुताबिक गणेश महाली इस बार यहां श्री गणेश कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि हेमंत सोरेन ने जानबूझकर गणेश महाली को चुनावी मैदान उतारा है। गणेश महाली की इस सीट पर ठीक-ठाक पकड़ है। वह भले ही अब तक चंपाई से हारते आए हैं लेकिन मुकाबला कभी भी एकतरफा नहीं हुआ है।

कहा जा रहा है कि जेएमएम का वोटबैंक उस को छोड़कर नहीं जाएगा। इसके साथ ही गणेश महाली माना जा रहा है कि गणेश बीजेपी का कुछ प्रतिशत वोट खींच पाने में कामयाब रहे हैं। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि कि गणेश महाली पिछले दो बार से यहां चंपाई से हारते चले आ रहे हैं। इसलिए इस बार उन्हें बीजेपी का सिंपैथी वोट भी मिल रहा है।

दोनों बार बड़ा नहीं था हार का अंतर

पिछले चुनाव में चंपाई सोरेन ने गणेश महाली पर 15 हजार के आस-पास वोटों से ही जीत दर्ज की थी। वहीं, 2014 में यह अंतर महज 1000 वोटों के करीब था। इस लिहाज से देखा जाए तो यहां इस बार समीकरण बदल सकते हैं। अब अगर चर्चाओं के मुताबिक गणेश महाली को सिंपैथी वोट मिला होगा तो इस बार चंपाई को वनवास मिल सकता है।

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