लोकतंत्र की ताकत: तमिलनाडु में महज 1 वोट से हार गए DMK के कद्दावर मंत्री, थलपति विजय की पार्टी ने दी शिकस्त

Tamil Nadu Election Results: तमिलनाडु चुनाव के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। यहां की एक विधानसभा की सीट पर 1 वोट की ताकत देखने को मिली। जब DMK के मंत्री को TVK ने बेहर करीबी मामले में हरा दिया।
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डीएमके मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन, फोटो- सोशल मीडिया
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K.R. Periyakaruppan Lost by 1 Vote: डीएमके मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन को तिरुप्पत्तूर सीट पर मात्र एक वोट के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। थलपति विजय की पार्टी ने महज एक वोट से सियासी समीकरण बदल दिया। थलपति विजय की पार्टी TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है।

साउथ सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम ने अपने पहले ही बड़े चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। राज्य की सभी 234 सीटों के नतीजों में TVK 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। वहीं, सत्ताधारी DMK 59 सीटों के साथ दूसरे और AIADMK 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस को केवल 5 सीटों से संतोष करना पड़ा है।

लोकतंत्र की ताकत का असल नमूना

लोकतंत्र में हर एक वोट की अहमियत का सबसे बड़ा उदाहरण तमिलनाडु की तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट पर देखने को मिला। डीएमके के दिग्गज नेता और सहकारिता मंत्री केआर पेरियाकरुप्पन मात्र 1 वोट के अंतर से चुनाव हार गए। मतगणना के अंत में टीवीके के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति को 83,375 वोट मिले, जबकि पेरियाकरुप्पन 83,374 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। यह हालिया चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक माना जा रहा है।

तमिलनाडु में TVK की आंधी

इस चुनाव में केवल पेरियाकरुप्पन ही नहीं, बल्कि कई बड़े राजनीतिक चेहरों को हार का स्वाद चखना पड़ा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन खुद अपनी कोलाथुर सीट हार गए। उन्हें TVK के वीएस बाबू ने 8,795 वोटों के अंतर से पराजित किया। बात करें बंगाल के चुनावी नतीजों की तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी ने 15,000 से अधिक वोटों से हरा दिया है।

तमिलनाडु के इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की जनता ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से इतर एक नए विकल्प को चुना है। जहां एक ओर बंगाल में भाजपा की जीत और 7वें वेतन आयोग के वादों की चर्चा है, वहीं दक्षिण में विजय की पार्टी के उदय को एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत माना जा रहा है। तिरुप्पत्तूर की घटना ने साफ संदेश दिया है कि राजनीति में किसी भी जीत को हल्का नहीं लिया जा सकता और एक-एक वोट सत्ता की तस्वीर बदलने की ताकत रखता है।

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