असम चुनाव: दिसपुर में होगा महासंग्राम! क्या प्रद्युत बोरदोलोई बचा पाएंगे BJP का किला, जानिए क्यों फंसेगा पेच?

Dispur Assembly Election: असम की राजधानी दिसपुर में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, जहां भाजपा ने अपने सिटिंग विधायक को बदलकर कांग्रेस से आए प्रद्युत बोरदोलोई पर दांव खेला है।
assam assembly election seat profile
फोटो- नवभारत
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Dispur Constituency Profile News: असम की राजनीति का केंद्र 'दिसपुर' न केवल राज्य की प्रशासनिक राजधानी है, बल्कि यह गुवाहाटी का एक ऐसा हाई-प्रोफाइल चुनावी क्षेत्र भी है जो पूरे राज्य की सियासी दिशा तय करता है। साल 1973 से असम की राजधानी के रूप में कार्य कर रहे दिसपुर में 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है।

इस बार यहां की लड़ाई सिर्फ विकास की नहीं, बल्कि साख और वफादारी की भी है। जहां एक तरफ भाजपा ने अपनी रणनीति बदलते हुए एक 'टर्नकोट' नेता को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

प्रद्युत बोरदोलोई की एंट्री से भाजपा में घमासान

दिसपुर सीट पर इस बार सबसे बड़ा उलटफेर भाजपा के खेमे में देखने को मिला है। पार्टी ने दो बार के विजेता सिटिंग विधायक अतुल बोरा का टिकट काटकर हाल ही में कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद प्रद्युत बोरदोलोई को अपना उम्मीदवार बनाया है। बोरदोलोई ने कांग्रेस में 'घुटन' महसूस होने का हवाला देते हुए भाजपा का दामन थामा था। हालांकि, इस फैसले ने भाजपा के भीतर ही बगावत के सुर तेज कर दिए हैं। अतुल बोरा ने इसे 'विश्वासघात' करार दिया है और निर्दलीय चुनाव लड़ने या प्रतिद्वंद्वियों को समर्थन देने के संकेत दिए हैं, जिससे भाजपा की 'सुनिश्चित जीत' की राह में कांटे बिछ सकते हैं।

परिसीमन का असर: बदल गया दिसपुर का सियासी भूगोल

2023 के परिसीमन अभ्यास ने दिसपुर विधानसभा के मतदाता आधार को पूरी तरह बदल दिया है। कभी 4 लाख से अधिक मतदाताओं वाला यह क्षेत्र अब घटकर 2,43,176 मतदाताओं का एक कॉम्पैक्ट और शहरी निर्वाचन क्षेत्र बन गया है। ग्रामीण इलाकों और कई बूथों के हटने से अब यह निर्वाचन क्षेत्र 67.84% शहरी आबादी वाला बन चुका है। सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव से मुस्लिम (11.40%), अनुसूचित जाति (7.82%) और अनुसूचित जनजाति (7.03%) के मतदाताओं का समीकरण भी प्रभावित हुआ है, जो अब नए उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।

त्रिकोणीय मुकाबला: कांग्रेस और आप की कड़ी चुनौती

भाजपा के प्रद्युत बोरदोलोई को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने अपनी तेजतर्रार नेता मीरा बोरठाकुर गोस्वामी को मैदान में उतारा है, जो कभी बोरदोलोई की ही सहयोगी रही हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी शहरी इलाकों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए बल्लभ पात्रा को टिकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। दिसपुर, जो असम सचिवालय और विधान सभा जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं का घर है, वहां की जागरूक शहरी जनता इस बार दलबदल और स्थानीय मुद्दों के बीच अपना फैसला सुनाएगी।

भाजपा और सहयोगियों का सीटों का गणित

चुनावों के मद्देनजर सत्ता में बैठी गठबंधन ने अपनी सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी इस बार असम की कुल 126 सीटों में से 89 सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी। गठबंधन के अन्य साथियों की बात करें तो असम गण परिषद को 26 सीटें और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट को 11 सीटें दी गई हैं। भाजपा की इस रणनीति का मकसद एंटी-इंकंबेंसी को कम करने के लिए पुराने चेहरों की जगह नए और प्रभावी चेहरों को मौका देना है।

कांग्रेस और रायजोर दल का नया समझौता

दूसरी तरफ, विपक्षी खेमे ने भी भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए अपनी सीटों का बंटवारा फाइनल कर लिया है। कांग्रेस ने अखिल गोगोई के नेतृत्व वाले रायजोर दल के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत रायजोर दल असम की 13 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा, जबकि बाकी सीटों पर वे कांग्रेस के साथ मिलकर साझा रणनीति के तहत काम करेंगे। अब 4 मई को आने वाले नतीजे ही तय करेंगे कि दिसपुर की जनता ने भाजपा के नए प्रयोग को स्वीकारा है या कांग्रेस के पुराने भरोसे पर मुहर लगाई है।

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