चिराग की सीटें हुईं फाइनल, पर BJP-JDU की इन जीती हुई सीटों पर फंसा दिया पेंच; अब RS-MLC का ऑफर

Bihar Assembly Election के लिए लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने अब अपनी सीटों की डिमांड घटाकर कम कर दी है। लेकिन पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में की सोटों को लेकर अड़े है।
bihar-nda-seat-sharing-chirag-paswan-demands-35-seats-bjp-offers-mlc-rajyasabha
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान (फोटो- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Chirag Paswan on NDA Seat Sharing: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में सीट बंटवारे का सस्पेंस गहराता जा रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने नरमी दिखाते हुए अपनी मांग 40 से घटाकर 35 सीटों की कर दी है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी शर्त रख दी है। उन्होंने कुछ ऐसी सीटों पर दावा ठोका है जो फिलहाल बीजेपी, जेडीयू और यहां तक कि जीतन राम मांझी की पार्टी के कब्जे में हैं। इस नए दांव से एनडीए का पूरा समीकरण उलझ गया है और बीजेपी को अब उन्हें मनाने के लिए एमएलसी और राज्यसभा सीट का ऑफर देना पड़ रहा है।

चिराग पासवान का असल दांव सीटों की संख्या से ज्यादा अपनी पसंद की सीटों पर है। एनडीए के भीतर गतिरोध की मुख्य वजह यही है कि एलजेपी (रामविलास) ने गोविंदगंज, मटिहानी और सिकंदरा जैसी सीटों की मांग कर दी है, जिन पर गठबंधन के मौजूदा विधायक हैं। चिराग अपने प्रभाव वाले पांच लोकसभा क्षेत्रों- हाजीपुर, जमुई, वैशाली, खगड़िया और समस्तीपुर में कम से कम दो-दो विधानसभा सीटें चाहते हैं। बीजेपी ने चिराग को 26 सीटों का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इन विवादित सीटों पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।

इन सीटों पर है असली लड़ाई

चिराग की लिस्ट में सबसे बड़ा पेंच गोविंदगंज और भ्रमपुर सीट को लेकर है। एलजेपी गोविंदगंज से अपने प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी को उम्मीदवार बनाना चाहती है, जबकि यह बीजेपी की सीटिंग सीट है। इसी तरह, भ्रमपुर सीट से चिराग हुलास पांडे को उतारना चाहते हैं, पर बीजेपी वहां से अपने नेता संतोष राय को चुनाव लड़ाने का मन बना चुकी है। इसके अलावा चिराग की सूची में महनार, महुआ, मुरवा, अलौली, भागलपुर सदर, बख्तियारपुर, फतुहा, ओबरा, शेखपुरा, अरवल और जहानाबाद जैसी महत्वपूर्ण सीटें भी शामिल हैं।

मांझी भी अड़े, कुशवाहा को करना होगा समझौता

एनडीए में सिर्फ चिराग ही नहीं, बल्कि दूसरे सहयोगी भी अपनी मांगों को लेकर मुखर हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी अपनी 15 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे चुनाव ही नहीं लड़ेंगे। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 10 से भी कम सीटों पर समझौता करना पड़ सकता है। इस बीच, जेडीयू और बीजेपी के बीच 100-100 सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावना है, लेकिन छोटे दलों की खींचतान ने अंतिम फैसले को रोक रखा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com