राहुल गांधी की मोदी सरकार से मांग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाएं और ग्रेच्युटी भी दें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी सरकार से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए उच्च मानदेय और ग्रेच्युटी की मांग की है। इस संबंध में उन्होेंने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री को पत्र भी लिखा है।
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राहुल गांधी, फोटो - मीडिया गैलरी
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नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मानदेय में बढ़ोतीरी करने और सेवानिवृत्ति के बाद ग्रेच्युटी दिलाने में सहायता करने की मांग उठाई है। उन्होंने सरकार से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की स्थिति और सामाजिक सुरक्षा के स्तर में सुधार करने की राह प्रशस्त करने की डिमांड की है।

कांग्रेस नेता ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी को पत्र लिखकर कहा है कि हाईकोर्ट ने तीन वर्ष पहले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को औपचारिक कर्मियों के रूप में मान्यता दी थी। उन्हें ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी का हकदार भी बनाया था, लेकिन उनके हालात में आज भी सुधान नहीं हुआ है।

लोकसभा में बोले राहुल- सरकार ने क्यों नहीं उठाया कदम

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लेकर हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश पर भारत सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है। अखिल भारतीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ हाल ही में हुई बैठक का जिक्र करते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम का मजबूत स्तंभ बताया है। भूख और कुपोषण से लड़ने के साथ-साथ पूर्व-प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने में इन्होेंने बहुत सहायता की है। दिल्ली की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

कोविड के दौरान जान जोखिम में डालकर किया काम

उन्होंने कहा कि कोविड संकट के दौरान उन्होंने अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के रूप में व्यक्तिगत जोखिम उठाते हुए कर्तव्यों से ऊपर उठकर काम किया। गांधी ने 26 मार्च को लिखे अपने पत्र में कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए कड़ी मेहनत के बावजूद, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं दुर्भाग्यवश अपर्याप्त वेतन, कार्य स्थितियों और सामाजिक सुरक्षा की कमी से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा ग्रेच्युटी का भुगतान न होना था।  उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत और उनकी स्थिति को केंद्र समझे और उनके आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जो कि उनका हक है।

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