

New Delhi: राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में नहीं है या बहुमत में नहीं है, वहां उसकी रणनीति अन्य राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करना, सत्ता में आना और फिर उन्हें हाशिये पर धकेल देना है।
सिब्बल ने कहा कि यह रणनीति बिहार में सफल रही और अब महाराष्ट्र में इसे अपनाया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “भाजपा की राजनीतिक रणनीति: जिन राज्यों में वे सत्ता में नहीं हैं या बहुमत में नहीं हैं, वहां अन्य राजनीतिक दलों से गठबंधन करो, सत्ता में आओ और फिर उन्हें हाशिये पर डाल दो।”
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा ने 2,869 सीटों में से 1,425 सीट जीतकर बड़ी सफलता हासिल की। मुंबई और पुणे सहित एक दर्जन से अधिक नगर निगमों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। साथ ही पार्टी ने ठाकरे और पवार परिवारों के गढ़ में भी सेंध लगाई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 सदस्यीय निकाय में भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जिससे ठाकरे परिवार का तीन दशक पुराना दबदबा खत्म हो गया।
भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें जीतीं, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) को 65 सीटें मिलीं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को छह सीटें मिलीं। वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) को आठ, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को तीन, समाजवादी पार्टी को दो और राकांपा (शरद पवार) को बीएमसी में केवल एक सीट मिली।
भाजपा ने नवी मुंबई में 65, कल्याण-डोंबिवली में 50, मीरा-भायंदर में 78, नासिक में 72, पनवेल में 55, पुणे में 119, पिंपरी-चिंचवड में 84, सोलापुर में 87, छत्रपति संभाजीनगर में 57, नांदेड में 45 और नागपुर में 102 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया। पुणे में भाजपा ने पवार परिवार को चौंकाते हुए 119 सीटें जीतीं, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा 27 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और राकांपा (शरद पवार) को सिर्फ तीन सीटें मिलीं। कांग्रेस को 15 सीटों से संतोष करना पड़ा। अंतिम परिणामों के अनुसार, 29 नगर निकायों में कुल 2,869 सीटों में भाजपा ने 1,425 सीटें जीतकर प्रमुख पार्टी के रूप में अपनी ताकत दिखाई।
(एजेंसी इनपुट के साथ)