JNU हिंसा मामला: पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी 14 छात्रों को दी जमानत; कहा- 'ये पेशेवर या आदतन अपराधी नहीं हैं'

JNU Arrested Students Released: पटियाला हाउस कोर्ट ने जेएनयू प्रदर्शन मामले में गिरफ्तार 14 छात्रों को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी आदतन अपराधी नहीं हैं, इसलिए उन्हें जेल में रखना उचित नहीं।
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पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी 14 छात्रों को दी जमानत, फोटो- सोशल मीडिया
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JNU students Bail: जेएनयू के 'लॉन्ग मार्च' के दौरान हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार 14 छात्रों को पटियाला हाउस कोर्ट से शुक्रवार को बड़ी राहत मिली। दिल्ली पुलिस की ओर से न्यायिक हिरासत की मांग को ठुकराते हुए अदालत ने सभी को 25 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया।

पटियाला हाउस कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्रों की जमानत का पुरजोर विरोध किया। पुलिस ने अदालत से मांग की कि जांच को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए सभी 14 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाना अनिवार्य है। दिल्ली पुलिस के वकील ने दलील दी कि जेएनयू में पिछले कुछ समय से यूजीसी को लेकर विरोध किया जा रहा है, लेकिन यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था।

पुलिस ने क्या दी दलील?

पुलिस के अनुसार, करीब 300 लोगों का यह मार्च बिना किसी पूर्व अनुमति के इंडिया गेट की ओर निकाला जा रहा था। जब पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की और कथित रूप से उन पर हमला कर दिया। इस झड़प में कई पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आरोपी पहले भी कई मौकों पर बल प्रयोग कर चुके हैं और उनके खिलाफ पहले से ही चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। पुलिस को डर था कि रिहा होने पर ये छात्र दोबारा हिंसा का सहारा ले सकते हैं।

बचाव पक्ष बोला: 'बिना वर्दी' वालों ने छात्राओं को घसीटा

वहीं, आरोपियों के वकील ने पुलिस के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं और इसके लिए वे अदालत को लिखित आश्वासन देने को भी तैयार हैं। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। एक महिला छात्रा ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान 4-5 लोग, जो पुलिस की वर्दी में नहीं थे, उन्होंने उसे भीड़ से जबरन खींच लिया। छात्रा का दावा है कि इस खींचतान में उसे शारीरिक चोटें आई हैं और उसके हाथ पर खून के थक्के (blood clots) तक बन गए हैं। वकीलों ने तर्क दिया कि छात्रों को केवल उनके लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का उपयोग करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है और वे कोई पेशेवर अपराधी नहीं हैं।

अदालत का फैसला: 25 हजार का मुचलका, सख्त हिदायत

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि पुलिस अधिकारियों पर हमला करना एक गंभीर मामला है और इसे 'शांतिपूर्ण विरोध' की आड़ में अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने छात्रों के भविष्य और अपराध की प्रकृति को देखते हुए उन्हें राहत दी। अदालत ने उल्लेख किया कि जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम सजा केवल पांच वर्ष तक का प्रावधान है।

सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी छात्र "पेशेवर या आदतन अपराधी नहीं हैं"। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने सभी 14 आरोपियों को 25,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। कोर्ट ने छात्रों को निर्देश दिया कि वे भविष्य में किसी भी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और जांच अधिकारी जब भी बुलाएंगे, उन्हें सहयोग करना होगा।

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