2027 की जनगणना में क्या होगा नया? मोबाइल से डेटा, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और कई बड़े बदलाव
Digital Census India: भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना 2027 में शुरू होगी। मोबाइल ऐप, सेल्फ-एन्यूमरेशन और जातिगत गणना समेत कई नई सुविधाएं शामिल होंगी।
- Written By: वंदना शर्मा
सांकेतिक तस्वीर (सोर्स सोशल मीडिया)
India Digital Census 2027: भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना 2027 से शुरू होगी। इस जनगणना में मोबाइल के जरिए डेटा को एकत्र किया जाएगा, जिसके माध्यम से हम सभी को सटीक और विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी। इतना ही नही बल्कि नीतियों को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी। यह जानकारी शनिवार को एक आधिकारिक फैक्ट-शीट के रूप में दी गई।
डिजिटल जनगणना 2027 से शुरू होगी
आपको बता दें कि यह बयान आधिकारिक के दूारा दिया गया है कि इस जनगणना में कई सारी सुविधाएं होंगी, जैसे कि सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम पोर्टल के माध्यम से लगभग रियल-समय की निगरानी, स्वंय से जानकारी भरने का विकल्प और जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा।रिपोर्ट के मुताबिक यह राजनैतिक मामलों की मंत्रीमंडलीय समीति ने 30 अप्रैल 2025 को की गई बैठक में जनगणना 2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया है।
डेटा को सुरक्षित रखने के मजबूत इंतजाम
बता दें कि इससे पहले भी एक बार 2011में की गई जनगणना तक बस केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की ही व्यवस्थित रूप से गणना होती थी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 11,718.24 करोड़ रूपए का बजट को फाईनल किया गया और इसी के साथ डेटा को सुरक्षित रखने के मजबूत इंतजाम किए गए है।
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लक्षित के साथ ही समावेशी नीति बनाना भी बहुत आसान
मिली जानकारी के अनुसार 2027 में शुरू होने वाली जनगणना को दो चरण में पूरा किया जाएगा, जिससे कि हमारे पूरे देश में व्यवस्थित रूप से और व्यापक तरीके के साथ डेटा को इकट्ठा किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि सुरक्षित डेटा सेंटर के साथ ही बड़े कार्यबल की मदद से यह जनगणना एक भरोसेमंद जानकारी प्रदान करेगी, जिसकी वजह से यह सभी लोगों को लक्षित के साथ ही समावेशी नीति बनाना भी बहुत आसान हो जाएगा।
बताते चले कि इस बयान में आगे यह भी कहा गया है कि जनगणना से जनसंख्या के डाटा को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है, इतना ही नही बल्कि खाना,पानी, ऊर्जा के साथ-साथ बुनियादी ढ़ाचे जैसे क्षेत्रों में काफी बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
यह भी बता दें कि यें स्थानीय स्तर पर भी जानकारी देता है, ताकि सरकारी योजनाओं को सटीक रूप से सही जगह तक पहुंचाया जा सके।
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विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है
रिपोर्ट के मुताबिक स्वतंत्रता के समय के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी, इतना ही नही यह जो पहले से अपडेट के साथ विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी। इससे बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के मुताबिक योजना को बनाना बहुत ही आसान हो जाएगा।
आपको बता दें कि किसी विशिष्ट क्षेत्र के सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों के संग्रह, संकलन, विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है।
इस जनगणना के माध्यम से एकत्रित की गई सूचनाओं का विशाल भंडार इसे योजनाकारों, प्रशासकों, शोधकर्ताओं और अन्य डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए एक बडे आंकड़ों का सबसे समृद्ध स्रोत बनाता है।
बता दें, कि जनगणना गवर्नेंस के लिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य करती है, जो कि राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
