दिल्ली के निजी स्कूलों को हाईकोर्ट से राहत, अब सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए नहीं चाहिए सरकार की इजाजत
Delhi High Court ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निजी स्कूल नए सत्र की शुरुआत में बिना शिक्षा निदेशालय की पूर्व अनुमति के फीस बढ़ा सकते हैं, हालांकि पुराने बकाया वसूलने पर रोक लगा दी गई है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
दिल्ली हाईकोर्ट, फोटो- सोशल मीडिया
Delhi High Court Fee Hike: दिल्ली के शिक्षा जगत में लंबे समय से चले आ रहे फीस विवाद पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को अपने प्रबंधन और विकास के लिए वित्तीय स्वतंत्रता का अधिकार है, बशर्ते वे नियमों के दायरे में रहकर सत्र की शुरुआत में ही ये बदलाव करें।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दिल्ली के बिना सहायता प्राप्त निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। अब इन स्कूलों को अपनी फीस बढ़ाने के प्रस्ताव के लिए शिक्षा निदेशालय की मंजूरी का इंतजार नहीं करना होगा।
अदालत ने माना कि स्कूल सत्र शुरू होने से पहले फीस बढ़ा सकते हैं और उन्हें केवल निदेशालय को इसकी सूचना देनी होगी। यह फैसला उन कई निजी स्कूलों की याचिकाओं पर आया है जिन्होंने तर्क दिया था कि निदेशालय द्वारा बार-बार फीस वृद्धि के प्रस्तावों को खारिज किए जाने से उनकी ‘आर्थिक स्वतंत्रता’ बुरी तरह प्रभावित हो रही थी।
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सत्र के बीच में फीस बढ़ाना अब भी नहीं होगा आसान
हालांकि हाईकोर्ट ने स्कूलों को सत्र की शुरुआत में छूट दी है, लेकिन सत्र के बीच में मनमानी पर लगाम बरकरार रखी है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि कोई स्कूल शैक्षणिक सत्र के बीच में अपनी फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से शिक्षा निदेशालय (DoE) की मंजूरी लेनी होगी।
इसका मतलब है कि अभिभावकों को बीच सत्र में अचानक आने वाले वित्तीय झटकों से सुरक्षा दी गई है। इसके साथ ही, कोर्ट ने निदेशालय के उन सभी पिछले आदेशों को रद्द कर दिया है जिन्होंने सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया था।
पुराने बकाये की वसूली पर पूरी रोक
अदालत ने अपने फैसले में अभिभावकों के हितों का भी खास ध्यान रखा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि स्कूल अब पुराने सालों की बढ़ी हुई फीस का बकाया अभिभावकों से नहीं वसूल सकते। विशेष रूप से सत्र 2016-17 या उससे भी पुराने सत्रों की बढ़ी हुई फीस की मांग अब नहीं की जा सकती।
इसके अलावा, स्कूलों की आखिरी प्रस्तावित फीस वृद्धि अब सीधे अप्रैल 2027 से ही लागू हो सकेगी। इस आदेश से उन हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है जो कोरोना काल या उसके बाद के पुराने बकाये के नोटिसों से परेशान थे।
‘लैंड क्लॉज’ का भेदभाव खत्म
इस फैसले का एक तकनीकी लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा ‘लैंड क्लॉज’ (जमीन से जुड़ी शर्त) से जुड़ा है। आमतौर पर डीडीए की जमीन पर बने स्कूलों के लिए निदेशालय अलग नियम अपनाता था, लेकिन कोर्ट ने इस अंतर को खारिज कर दिया है।
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अदालत ने कहा कि अलॉटमेंट लेटर में मौजूद ‘लैंड क्लॉज’ एक्ट और नियमों के दायरे से ऊपर नहीं हो सकता और न ही यह निदेशालय की कानूनी शक्तियों को बढ़ा सकता है। कोर्ट ने निदेशालय के पास लंबित पड़े फीस वृद्धि के सभी पुराने प्रस्तावों को भी बंद करने का आदेश दिया है।
