इंडोनेशिया में भारतीय नागरिकों को मौत की सजा पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, विदेश मंत्रालय को दिए ये निर्देश
इंडोनेशिया में भारतीय नागरिकों को मौत की सजा सुनाए जाने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मामले में विदेश मंत्रालय और वाणिज्यिक मंत्रालय को हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए हैं।
- Written By: यतीश श्रीवास्तव
दिल्ली हाईकोर्ट (सौजन्य- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: इंडोनेशिया की एक अदालत की ओर से तीन भारतीय नागरिकों को मौत की सुनाई गई है। इससे संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडोनेशिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास को यह निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए कि दोषियों को उचित कानूनी प्रतिनिधित्व मिले और अपीलीय उपायों को बढ़ाने में भी सहायता दी जाओए। यह भी आदेश दिया गया कि भारत में दोषी व्यक्तियों और उनके परिवारों के बीच संपर्क की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) के स्थायी वकील एडवोकेट आशीष दीक्षित ने प्रतिवादियों की ओर से नोटिस स्वीकार किया है और मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए कोर्ट से कुछ समय मांगा है। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने अगली सुनवाई 6 मई, 2025 को करनी निर्धारित की है।
हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय को दिए ये निर्देश
कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को लागू अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों या द्विपक्षीय समझौतों, यदि कोई हो, के तहत भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए इंडोनेशियाई सरकार के साथ कूटनीतिक रूप से जुड़ने का निर्देश भी दिया। मामला तीन भारतीय नागरिकों राजू मुथुकुमारन, सेल्वादुरई दिनाकरन और गोविंदसामी विमलकांधन की पत्नियों की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। इन्हें इंडोनेशियाई अदालत ने नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध को लेकर सजाए मौत की सजा सुनाई है। तीनों व्यक्ति एक शिपयार्ड में कार्यरत थे। इसी दौरान उनके पास से इंडोनेशियाई नारकोटिक्स विभाग ने नशीले पदार्थ बरामद किए थे और गिरफ्तार कर लिया था।
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इंडोनिशा की जिला अदालत ने सुनाई सजा
इसके बाद 25 अप्रैल, 2025 को तंजुंग बलाई करीमुन जिला न्यायालय के फैसले के अनुसार उन्हें इंडोनेशियाई कानून के तहत दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। याचिकाकर्तादोषी व्यक्तियों की पत्नियां यह तर्क देती हैं कि उनके पति अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले हैं और उनके पास इंडोनेशिया में निर्धारित अपीलीय उपाय को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय साधन नहीं हैं।
